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हर 15 दिन में रंग बदलती है उत्तराखंड की यह घाटी, जून से अक्टूबर के अंत तक पर्यटकों के लिए रहती है खुली

उत्तराखंड की फूलों की घाटी हर 15 दिन में बदलती है अपना रंग। यह घाटी 1 जून से अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। जानें यहां पहुंचने की पूरी ट्रैवल गाइड और जरूरी जानकारियां।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Sun, 01 June 2025 4:42:48

हर 15 दिन में रंग बदलती है उत्तराखंड की यह घाटी, जून से अक्टूबर के अंत तक पर्यटकों के लिए रहती है खुली

उत्तराखंड में घूमने के लिए वैसे तो कई खूबसूरत पर्यटन स्थल मौजूद हैं, लेकिन कुछ जगहें इतनी अद्भुत होती हैं कि उन पर यकीन करना मुश्किल होता है। ऐसी ही एक अनोखी जगह है 'वैली ऑफ फ्लावर्स' या 'फूलों की घाटी'। यह स्थान नेचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं और ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए भी यह एक बेहद रोमांचक अनुभव है। यह घाटी हर साल 1 जून से पर्यटकों के लिए खोल दी जाती है और अक्टूबर के अंत तक खुली रहती है। चलिए जानते हैं इस जादुई घाटी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें और यहां पहुंचने का पूरा सफरनामा।

कहां है फूलों की घाटी?

फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में, नंदा देवी नेशनल पार्क के समीप स्थित है। समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी करीब 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। यहां 500 से भी अधिक किस्मों के फूल पाए जाते हैं, जिनमें से कई दुर्लभ और विदेशी प्रजातियों की होती हैं। इस घाटी को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है और हर साल यहां लाखों पर्यटक देश-विदेश से भ्रमण के लिए आते हैं।

इस घाटी की खोज कैसे हुई?

सन 1932 में प्रसिद्ध वनस्पति शास्त्री फ्रैंक सिडनी स्माइथ ने 'वैली ऑफ फ्लावर्स' की खोज की थी। जब वे पर्वतारोहण से लौट रहे थे, तब रास्ता भटकने के दौरान उन्हें यह जादुई घाटी दिखी। इस अनुभव से प्रभावित होकर, वे 1937 में फिर यहां आए और कई दिन यहां रुककर इस घाटी पर 'वैली ऑफ फ्लावर्स' नामक पुस्तक भी लिखी। उन्होंने इस पुस्तक में उल्लेख किया कि यहां मौजूद फूल हर 15 दिन में रंग बदलते हैं, जिससे यह घाटी हर बार नई सी लगती है। इस खासियत के कारण इसे 'जादुई घाटी' भी कहा जाता है।

फूलों की घाटी कैसे पहुंचें?

यह घाटी साल में केवल चार महीने – जून से अक्टूबर के अंत तक – ही पर्यटकों के लिए खुली रहती है। यहां पहुंचने के लिए आपको पहले हरिद्वार या ऋषिकेश जाना होगा। इसके बाद सड़क मार्ग से जोशीमठ और फिर गोविंदघाट पहुंचना होता है। गोविंदघाट से करीब 3 किलोमीटर दूर पुलना नामक स्थान तक सड़क मार्ग उपलब्ध है। पुलना से लगभग 11 किलोमीटर की ट्रैकिंग कर घांघरिया पहुंचना होता है, और वहां से 4 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके आप 'वैली ऑफ फ्लावर्स' तक पहुंच सकते हैं।

यात्रा पर जाने से पहले ध्यान रखें ये बातें

यह ध्यान रखें कि 'वैली ऑफ फ्लावर्स' के आस-पास कोई दुकानें नहीं होतीं। इसलिए खाने-पीने की जरूरी चीजें, पानी आदि घांघरिया से ही साथ ले जाएं। इसके अलावा इस घाटी में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। भारतीय पर्यटकों के लिए इसकी फीस ₹150 है, जबकि विदेशी नागरिकों के लिए ₹600 निर्धारित की गई है।

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