
शारदीय नवरात्रि का शुभ पर्व आने ही वाला है। नौ दिनों तक पूरे देश में माता रानी के जयकारों की गूंज रहेगी, मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ेगा और हर जगह भक्ति का रंग देखने को मिलेगा। भारत में देवी माता के असंख्य मंदिर हैं, जिनमें से हर एक की अपनी पौराणिक कथा और मान्यताएं हैं। कुछ मंदिरों की कहानियां तो इतनी अद्भुत और रहस्यमयी हैं कि सुनने वाले भी हैरान रह जाते हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक अनोखी कथा सुनाने जा रहे हैं—राजगढ़ जिले के चामुंडा माता मंदिर की, जिसे लोग प्रेम और श्रद्धा से ‘पुलिस वाली माता मंदिर’ कहते हैं।
थाने की दीवार से प्रकट हुईं माता
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत कथा के कारण प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि जहां आज मंदिर है, वहां कभी सैनिक छावनी हुआ करती थी, जिसे बाद में पुलिस थाने में बदल दिया गया। जब इस थाने को सुठालिया स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया, तो अचानक थाने की दीवार से मां चामुंडेश्वरी की मूर्ति स्वयं प्रकट हो गई। यह चमत्कार देख लोग स्तब्ध रह गए। तभी से यह स्थान देवी का पवित्र धाम माना जाने लगा और इसे ‘पुलिस वाली माता’ का मंदिर कहा जाने लगा। आज भी मां के दर्शन दीवार में प्रकट हुई उसी मूर्ति के रूप में किए जाते हैं।
पुलिस विभाग संभालता है मंदिर की व्यवस्था
इस मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि इसकी संपूर्ण देखरेख पुलिस विभाग द्वारा की जाती है। मां के शृंगार से लेकर मंदिर में आयोजित भंडारे, पूजन-अर्चन और अन्य धार्मिक आयोजनों तक की सारी ज़िम्मेदारी पुलिस के ही हाथों में रहती है। न केवल मंदिर की व्यवस्था, बल्कि उसका खर्च भी पुलिस प्रशासन उठाता है। कहा जाता है कि देवी प्रकट होने की यह घटना आज भी थाने के आधिकारिक रेकॉर्ड्स में दर्ज है।
मान्यताओं से जुड़ी रोचक बातें
‘पुलिस वाली माता’ मंदिर से जुड़ी मान्यताएं भी कम दिलचस्प नहीं हैं। सुठालिया थाने में जब भी किसी नए पुलिसकर्मी की नियुक्ति होती है, तो सबसे पहले उसे मंदिर में माता के दरबार में हाज़िरी देनी होती है। लोगों का विश्वास है कि देवी की अनुमति के बिना यहां कोई लंबे समय तक टिक नहीं पाता—जल्द ही उसका ट्रांसफर या निलंबन हो जाता है। इतना ही नहीं, अगर किसी पुलिसकर्मी को अपना स्थानांतरण रुकवाना होता है, तो वह भी माता के मंदिर में अर्जी लगाता है।














