
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी इस साल 16 अगस्त को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह अवसर न सिर्फ भक्ति-भाव से ओत-प्रोत होता है, बल्कि मंदिरों की साज-सज्जा और उल्लासपूर्ण माहौल भी इसे अविस्मरणीय बना देते हैं। चारों ओर गूंजते भजन-कीर्तन, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाते मंदिर और आकर्षक झांकियां, इस पर्व को और भी भव्य बना देते हैं। दिल्ली-एनसीआर में जन्माष्टमी का उत्सव एक अलग ही नजारे के साथ मनाया जाता है, जहां कुछ मंदिरों की लोकप्रियता मथुरा-वृंदावन से कम नहीं है। आइए जानते हैं, इस पावन दिन पर किन मंदिरों में जाकर आप भक्ति का चरम अनुभव पा सकते हैं।
1. इस्कॉन मंदिर, द्वारका
द्वारका स्थित इस्कॉन मंदिर कृष्ण भक्तों का प्रमुख केंद्र है और दिल्ली-एनसीआर में जन्माष्टमी के सबसे बड़े आयोजनों में से एक का गवाह बनता है। जन्माष्टमी पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसमें देश-विदेश से आए भक्त भी शामिल होते हैं। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण को हजारों फूलों, रंगीन लाइटों और पारंपरिक सजावट से सजाया जाता है, जिससे पूरा वातावरण दिव्य और मनमोहक बन जाता है।
पूरे दिन भजन-कीर्तन, भगवत कथा, रास-लीला और धार्मिक नृत्य-नाटिकाओं का आयोजन होता है, जो आगंतुकों को भगवान कृष्ण की लीलाओं में खो जाने पर मजबूर कर देता है। भव्य मेला, शॉपिंग स्टॉल और स्वादिष्ट प्रसाद यहां के आकर्षण को और बढ़ा देते हैं। रात 12 बजे होने वाली महाआरती और भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव यहां का मुख्य आकर्षण है, जिसमें घंटियों की धुन, शंखनाद और भक्तों की जयकार पूरे माहौल को भक्ति से भर देते हैं।
2. छतरपुर मंदिर
दिल्ली का भव्य और विशाल छतरपुर मंदिर जन्माष्टमी के अवसर पर अद्वितीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल में रंग जाता है। यहां का कृष्ण मंदिर भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है, जबकि परिसर में शिव, दुर्गा, हनुमान, लक्ष्मी और विष्णु के भी भव्य मंदिर स्थित हैं, जो विविध धार्मिक भावनाओं को एक स्थान पर समेटे हुए हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर प्रांगण को हजारों दीपकों, रंगीन रोशनियों और फूलों की सजावट से ऐसे सजाया जाता है कि यह दृश्य मानो किसी स्वर्गिक लोक का अनुभव कराता है। यहां आयोजित भजन-कीर्तन, श्रीकृष्ण लीला मंचन, और सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तों को भक्ति और आनंद में डूबो देते हैं।
मध्यरात्रि की विशेष आरती और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की मंगल ध्वनि पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। भक्तजन इस पावन रात में प्रसाद वितरण, सत्संग और ध्यान में शामिल होकर अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं।
3. बिड़ला मंदिर (लक्ष्मी नारायण मंदिर)
दिल्ली के कनॉट प्लेस के निकट स्थित बिड़ला मंदिर, जिसे लक्ष्मी नारायण मंदिर भी कहा जाता है, शहर के सबसे प्रसिद्ध और भव्य मंदिरों में से एक है। इसकी भव्य वास्तुकला, आकर्षक सजावट और मनमोहक लाइटिंग इसे खास बनाती है। सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी कलात्मक सुंदरता के लिए भी पर्यटकों और भक्तों को आकर्षित करता है।
जन्माष्टमी के अवसर पर यहां का माहौल और भी खास हो जाता है। दिनभर भगवान कृष्ण के जन्म की तैयारियां होती हैं, मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों और झिलमिलाती लाइट्स से सजाया जाता है। ठीक रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव विशेष पूजा और आरती के साथ मनाया जाता है। उस समय बजती घंटियों की मधुर ध्वनि, भजन-कीर्तन और वातावरण में फैली फूलों की खुशबू भक्तों के मन को अद्भुत शांति और आनंद से भर देती है।
धार्मिक आस्था, वास्तुकला की सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव—ये सभी बिड़ला मंदिर को दिल्ली आने वाले हर पर्यटक के लिए एक जरूरी दर्शनीय स्थल बना देते हैं।
4. गीता गायत्री धाम
गुड़गांव के सेक्टर 40 में स्थित गीता गायत्री धाम वेदमाता गायत्री और भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है। मंदिर परिसर में विशाल और भव्य प्रार्थना हॉल, सुंदर नक्काशीदार मूर्तियां और शांतिपूर्ण वातावरण भक्तों को मन की गहराई तक सुकून देता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु ध्यान, जप और सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में भजन संध्या, विशेष पूजा-अर्चना, झांकी सजावट और प्रसाद वितरण का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से भक्त शामिल होते हैं। इसके अलावा, साल भर यहां गायत्री मंत्र साधना, हवन यज्ञ, और धार्मिक प्रवचन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मंदिर की शांत और पवित्र आभा न केवल धार्मिक अनुभव प्रदान करती है, बल्कि यह स्थान सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों का भी केंद्र है।
5. श्री राधा कृष्ण मंदिर
पूर्वी दिल्ली में स्थित यह मंदिर अपनी खूबसूरत सजावट और मनोहारी झांकियों के लिए प्रसिद्ध है। जन्माष्टमी पर फूलों और लाइटों से सजा यह स्थल श्रद्धालुओं को भक्ति-भाव से सराबोर कर देता है। यहां धार्मिक नाटक, कृष्ण लीला और कीर्तन का आयोजन होता है, जो माहौल को पवित्रता और उत्साह से भर देता है।
विशेष रूप से जन्माष्टमी की रात को मंदिर में भक्तों का भारी जमावड़ा होता है। भव्य मंगला आरती, रसोई में तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजन और प्रसाद वितरण का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। मंदिर के प्रांगण में सजाई गई झांकियां भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न चरणों को जीवंत कर देती हैं, जिन्हें देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। इसके अलावा, भक्तगण यहां ध्यान और भजन के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव भी करते हैं।














