इन कठिन धार्मिक यात्राओं के लिए जाना जाता हैं भारत, जीवन में जरूर जाएं यहां

By: Neha Mon, 05 Dec 2022 4:54:53

इन कठिन धार्मिक यात्राओं के लिए जाना जाता हैं भारत, जीवन में जरूर जाएं यहां

भारत एक विशाल देश हैं जिसे अपने आध्यात्म के लिए जाना जाता हैं। देश में कई धार्मिक स्थल हैं जिनकी यात्रा करने देशवासी ही नहीं, बल्कि विदेशी लोग भी पहुंचते हैं। भारत में धार्मिक यात्रा का काफी महत्व हैं लेकिन कई धार्मिक यात्राएं इतनी कठिन होती हैं कि भक्तों के लिए यहां जाना मुश्किल हो जाता हैं और कुछ खास परिस्थितियों में तो लोगों को यहां जाने की इजाजत भी नहीं मिलती। लेकिन भक्तों की आस्था के सामने ये कठिन सफर भी आसान हो जाते हैं। यहां हम आपको भारत की कुछ ऐसी ही सबसे मुश्किल धार्मिक यात्राओं के बारे में बताने जा रहे हैं जो कठिन होने के बावजूद हर साल लाखों की संख्या में यहां यात्री पहुंचते हैं। तो चलिए जानते हैं भारत की सबसे मुश्किल धार्मिक यात्राओं के बारे में...

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अमरनाथ

अमरनाथ भी बेहद दुर्गम तीर्थस्थलों में से एक है और यह श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 किलोमीटर दूर यह तीर्थस्थल समुद्रतल से 13600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तापमान अक्सर शून्य से चला जाता है और बारिश, भूस्खलन कभी भी हो सकते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील और संदिग्ध मानी जाने वाली यात्रा के लिए पहले रजिस्ट्रशेन कराना होता है। बीमार और कमजोर यात्री अक्सर इस यात्रा से लौटा दिए जाते हैं।

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पंच केदार

पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में लगभग 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांच मंदिरों का एक समूह है। इसके लिए आपको जंगली घने जंगलों से गुजरना पड़ता है और 12000 फीट तक की ऊंचाई वाले खड़े पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है। अगर आपके पास गाइड नहीं है तो खो जाना भी बहुत आसान है, जो इसे बहुत चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

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कैलाश मानसरोवर

कैलाश मानसरोवर की यात्रा में 28 दिन लगते हैं और यहां सीधे पहुंचने का कोई सड़क या रेलमार्ग नहीं है। इस यात्रा को अधिकतर पैदल ही पूरा करना होता है। इसके अलावा अस्थमा, दिल की बिमारी और ब्लड प्रेशर मरीजों को इस कैलाश मानसरोसवर यात्रा की अनुमति नहीं मिलती है। इस यात्रा के लिए व्यक्ति की उम्र 18 साल से ज्यादा और 70 साल से कम होनी चाहिए।

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शिखर जी

झारखंड राज्य के गिरीडीह ज़िले में छोटा नागपुर पठार पर स्थित विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल शिखर जी है। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने इसी जगह पर मोक्ष की प्राप्ति की थी। 1,350 मीटर (4,430 फ़ुट) ऊँचा यह पहाड़ झारखंड का सबसे ऊंचा स्थान भी है। 20 तीर्थंकरों की मोक्ष प्राप्ति की जगह होने के कारण इस जगह को ‘तीर्थों का राजा’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ हर साल लाखों जैन धर्मावलंबी और अन्य पर्यटक वंदना करने आते हैं।

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वैष्णोदेवी

वैष्णो देवी जम्मू-कश्मीर के कटरा जिले में स्थित हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह मंदिर 5,200 फ़ीट की ऊंचाई और कटरा से लगभग 12 किलोमीटर (7.45 मील) की दूरी पर मौजूद है। माता के मंदिर में जाने की यात्रा बेहद दुर्गम है। कटरा से 14 किमी की खड़ी चढ़ाई पर मां वैष्णोदवी की गुफा है। हालांकि अब हेलीकॉप्टर से भी आप यहां पहुंच सकते हैं।

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श्रीखंड महादेव

ये भारत में सबसे कठिन ट्रेक में से एक माना जाता है। श्रीखंड महादेव उन लोगों के लिए एक एडवेंचर हैं जो अपनी लिमिट को पुश करना पसंद करते हैं। जंगली जानवरों से भरे घने जंगलों में घूमने से लेकर खड़े पहाड़ों पर चढ़ने से लेकर लगभग 14000 फीट की ऊंचाई तक, 6 फीट बर्फ से ढके विशाल ग्लेशियरों के माध्यम से चलना थोड़ा मुश्किल होता है। संसाधनों की कमी वाले हिमालय की बंजर भूमि में खुद का हौसला बांधे रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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बद्रीनाथ

उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। यह भारत के चार धामों में से एक है। यह एक प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण 7वीं और 9वीं सदी में होने के प्रमाण मिलते हैं। इस मंदिर के बारे में विष्णु पुराण, महाभारत तथा स्कन्द पुराण जैसे कई प्राचीन ग्रन्थों में उल्लेख किया गया है। समुद्रतल से बद्रीनाथ मंदिर की ऊँचाई 3,133 मीटर है, जिस वजह से यहां की यात्रा दुर्गम मानी जाती है। फिर भी यहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि नौवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य छह महीनों के लिए बद्रीनाथ और फिर शेष वर्ष केदारनाथ में रहते थे।

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हेमकुंड साहिब

हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक गुरुद्वारा है। ये गढ़वाल क्षेत्र के 7 प्रसिद्ध हिमालयी चोटियों से ढके लगभग 16000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, नंदा देवी उनमें से एक है। कई तीर्थयात्री ग्लेशियर के माध्यम से अपना रास्ता बनाते हैं लेकिन ये काफी मुश्किल होता है। अधिकतर लोगों को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ता है। यहां जाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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