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पेशाब में खून को न लें हल्के में, यह हो सकता है किडनी कैंसर का पहला लक्षण

पेशाब में खून आना हमेशा सामान्य नहीं होता। यह किडनी कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। जानें इसके लक्षण, जोखिम कारक, जरूरी जांच और डॉक्टर कब दिखाना चाहिए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 28 Jun 2026 9:27:40

पेशाब में खून को न लें हल्के में, यह हो सकता है किडनी कैंसर का पहला लक्षण

आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इनमें किडनी कैंसर एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसे अक्सर "साइलेंट कैंसर" कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि शुरुआती चरण में यह बीमारी लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में विकसित होती रहती है। कई बार महीनों या वर्षों तक मरीज को इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि उसकी किडनी में ट्यूमर पनप रहा है। जब तक बीमारी के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने आते हैं, तब तक कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है, जिससे उपचार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर शरीर में होने वाले मामूली बदलावों को भी गंभीरता से लेने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह देते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी कैंसर के सबसे शुरुआती और महत्वपूर्ण संकेतों में से एक है पेशाब में खून आना। मेडिकल भाषा में इसे हीमेच्यूरिया (Hematuria) कहा जाता है। हालांकि हर बार पेशाब में खून आने का अर्थ किडनी कैंसर नहीं होता, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्षण को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि पेशाब में एक बार खून दिखाई दे और बाद में अपने आप बंद भी हो जाए या इसके साथ दर्द महसूस न हो, तब भी तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

डॉक्टर बताते हैं कि किडनी में विकसित होने वाला ट्यूमर कई बार बिना दर्द और बिना किसी अन्य स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। जब यह ट्यूमर किडनी के उस हिस्से को प्रभावित करने लगता है जहां पेशाब एकत्र होता है, यानी रीनल पेल्विस और कैलिसियल सिस्टम, तब पेशाब में खून आने की समस्या शुरू हो सकती है। कई लोग यह सोचकर लापरवाही कर देते हैं कि यदि कुछ समय बाद ब्लीडिंग रुक गई तो सब कुछ सामान्य हो गया होगा। जबकि वास्तविकता यह है कि खून का बंद हो जाना बीमारी के खत्म होने का संकेत नहीं होता।

सबसे बड़ी गलतफहमी यह भी है कि अधिकतर लोग मानते हैं कि यदि पेशाब में खून आने के साथ दर्द नहीं है, तो चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन किडनी कैंसर के कई मामलों में बिना दर्द के ही ब्लीडिंग होती है, जिससे मरीज अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या गहरा भूरा दिखाई देने लगता है, जिससे खून साफ नजर आता है। वहीं कुछ मरीजों में रक्त की मात्रा इतनी कम होती है कि सामान्य रूप से दिखाई नहीं देती और केवल रूटीन यूरिन जांच के दौरान ही इसका पता चलता है। इस स्थिति को माइक्रोस्कोपिक हीमेच्यूरिया कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना सबसे सही कदम है।

हालांकि किडनी कैंसर किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है। इनमें 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग, धूम्रपान करने वाले, मोटापे से पीड़ित व्यक्ति, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज और वे लोग शामिल हैं जिनके परिवार में पहले किसी सदस्य को किडनी कैंसर हो चुका हो। ऐसे लोगों को यदि एक बार भी पेशाब में खून दिखाई दे, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यूरिन इंफेक्शन, किडनी स्टोन या अन्य यूरिनरी समस्याओं के कारण भी ब्लीडिंग हो सकती है, लेकिन असली वजह का पता केवल मेडिकल जांच से ही लगाया जा सकता है।

जब किसी मरीज को पेशाब में खून आने की शिकायत होती है, तो डॉक्टर सबसे पहले यूरिन टेस्ट कराते हैं ताकि रक्त की मौजूदगी की पुष्टि की जा सके। इसके बाद जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई या अन्य इमेजिंग जांच की सलाह दी जाती है। इन जांचों की मदद से किडनी और पूरे यूरिनरी ट्रैक्ट की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इसके आधार पर डॉक्टर यह निर्धारित करते हैं कि ब्लीडिंग संक्रमण, पथरी या फिर किडनी कैंसर जैसी किसी गंभीर बीमारी के कारण हो रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किडनी कैंसर का समय रहते पता चल जाए, तो इसका इलाज काफी हद तक सफल हो सकता है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर उपचार के विकल्प अधिक होते हैं और मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ जाती है। लेकिन दुर्भाग्यवश यह बीमारी अक्सर बिना दर्द और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती है, जिसके कारण अधिकांश लोग काफी देर से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं।

डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी भी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के पेशाब में खून दिखाई दे, चाहे वह केवल एक बार ही क्यों न हुआ हो या बाद में अपने आप बंद हो गया हो, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना जरूरी है। समय पर जांच, सही निदान और शीघ्र उपचार न केवल गंभीर बीमारी को शुरुआती अवस्था में पकड़ने में मदद करता है, बल्कि इलाज के बेहतर परिणाम और मरीज के स्वस्थ होने की संभावना भी काफी बढ़ा देता है।

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