गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। उनकी शादी को 37 साल से ज्यादा हो चुके हैं। सुनीता ने साल 1987 में शादी रचाई थी, जब गोविंदा बॉलीवुड में अपनी पहचान बना रहे थे। इस साल की शुरुआत में सुनीता ने खुलासा किया था कि वह गोविंदा से अलग रहती हैं। सुनीता के इस बयान के बाद उनके रिश्ते में परेशानी की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि अब सुनीता ने इन अफवाहों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें और गोविंदा को कोई भी अलग नहीं कर सकता।
सुनीता ने शिरडी टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि मुझे और गोविंदा को इस दुनिया में कोई माई का लाल अलग नहीं कर सकता है। मेरे और उसके बीच मस्ती-मजाक चलता रहता है। बाहरवालों से ज्यादा घर के लोग होते हैं, जो घर को तोड़ना चाहते हैं, लेकिन मैं ऐसी हूं कि मैं घर तोड़ने नहीं दूंगी। घर-परिवार में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो घर तोड़ देते हैं। लेकिन उन लोगों को मैं जीतने नहीं दूंगी, जीत मेरी ही होगी, क्योंकि साईं बाबा मेरे साथ हैं। अपने-अपने पति को संभालकर रखो, मैंने यही कहा है। वो क्रिकेटर की तरह होते हैं कभी अच्छे तो कभी खराब।
अपने पति को हाथ में पकड़कर रखो, जैसे मैंने पकड़कर रखा है। अगर हाथ में नहीं आता है, तो मारो पकड़कर (हंसते हुए)। कुछ समय पहले सुनीता ने बताया था कि उनके दो घर हैं, जिनमें एक बंगला और एक अपार्टमेंट शामिल है। वह दोनों बच्चों के साथ अपार्टमेंट में रहती हैं, जबकि गोविंदा बंगले में रहना पसंद करते हैं।
जयदीप अहलावत ने दोस्त विजय वर्मा को लेकर शेयर किया किस्सा
एक्टर जयदीप अहलावत और विजय वर्मा कई सालों से काफी अच्छे दोस्त हैं। दोनों FTII पुणे के दिनों से एक-दूसरे के संपर्क में हैं। उन्होंने 'चितगोंग', 'बागी 3' और 'जाने जान' जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। इन दिनों ‘पाताल लोक 2’ वेब सीरीज से वाहवाही लूट रहे जयदीप ने विजय से जुड़ा एक किस्सा याद किया और बताया कि कैसे अभिनेता उन्हें एक अवार्ड के चलते गालियां देने लगे थे।
जयदीप ने पूजा तलवार के शो में कहा कि विजय और मुझे हाल ही में एक ही केटेगरी में नॉमिनेशन मिला था और ‘महाराज’ के लिए मुझे अवार्ड मिला। वो उस दिन तो मेरे लिए खुश थे, लेकिन अगले दिन मुझे गालियां दे रहे थे कि ये मेरा अवार्ड खा गया। यह बहुत हेल्दी और मजेदार है। यह आपके सिस्टम को अलाइन करता है। हर अभिनेता को उस दिन का बेसब्री से इंतजार होता है जब वह सफल हो जाता है।
इस बीच वह उस अवसर के लिए खुद को तैयार करता है कि जब उसे बस एक यादगार किरदार निभाने को मिल जाए। शायद एक दशक पहले, मैं ‘पाताल लोक’ नहीं कर पाता। आज हम तीनों (राजकुमार राव, विजय और मैं) को पुरस्कारों के लिए नामांकित होते देखना, यहां तक कि इसे एक-दूसरे को देना, हममें से किसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की थी।














