
आर्यन खान द्वारा निर्देशित नेटफ्लिक्स सीरीज ‘बैंड्स ऑफ बॉलीवुड’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस सीरीज में खुद को गलत तरीके से दिखाए जाने का आरोप लगाते हुए एनसीबी के पूर्व जोनल डायरेक्टर और आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। उन्होंने दावा किया है कि सीरीज में उनके खिलाफ जानबूझकर “झूठे और अपमानजनक दृश्य” दिखाए गए हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
10 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि अब अगली सुनवाई 10 नवंबर 2025 को होगी। अदालत ने सभी पक्षों — वानखेड़े, नेटफ्लिक्स, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और आर्यन खान — को अपनी-अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान समीर वानखेड़े की ओर से सीनियर एडवोकेट जे साई दीपक, जबकि नेटफ्लिक्स की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव नायर पेश हुए।
क्या है मामला?
समीर वानखेड़े ने प्रोडक्शन कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स, एक्स कॉर्प (पूर्व में ट्विटर), गूगल एलएलसी, मेटा प्लेटफॉर्म्स, आरपीजी लाइफस्टाइल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और जॉन डो को प्रतिवादी बनाया है। वानखेड़े ने अपनी याचिका में सीरीज से उन दृश्यों को हटाने की मांग की है जिन्हें उन्होंने “अपमानजनक, झूठा और मानहानिकारक” बताया है। साथ ही उन्होंने 2 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है, जिसे वे कैंसर पीड़ितों के इलाज के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल को दान करने की बात कह चुके हैं।
कोर्ट के पूर्व निर्देश और संशोधन का मामला
इससे पहले, कोर्ट ने वानखेड़े को यह स्पष्ट करने के लिए कहा था कि उन्होंने यह मुकदमा दिल्ली में ही क्यों दायर किया, जबकि घटना और विवाद मुंबई से संबंधित हैं। कोर्ट ने उन्हें अपनी याचिका में संशोधन करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद अब सुनवाई 10 नवंबर तक टाल दी गई है।
वानखेड़े का आरोप – “प्रतिष्ठा धूमिल करने की साजिश”
वानखेड़े का कहना है कि वेब सीरीज को जानबूझकर इस तरह डिजाइन और प्रसारित किया गया है ताकि जनता के बीच उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सीरीज में एक किरदार को “सत्यमेव जयते” बोलने के बाद मध्यमा उंगली दिखाते हुए दिखाया गया है, जो न केवल अशोभनीय है बल्कि राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 का उल्लंघन भी है।
उन्होंने आगे कहा कि सीरीज के कई दृश्य ऐसे हैं जो न केवल आईटी अधिनियम बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इनमें “अश्लील, आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री” का उपयोग किया गया है, जो जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
सीरीज से जुड़ा पृष्ठभूमि विवाद
गौरतलब है कि आर्यन खान की यह वेब सीरीज ‘बैंड्स ऑफ बॉलीवुड’ कथित तौर पर बॉलीवुड में ड्रग्स और शक्ति के खेल पर आधारित है। कहा जा रहा है कि इसमें 2021 के उस क्रूज़ ड्रग केस से मिलते-जुलते संदर्भ दिखाए गए हैं, जिसमें आर्यन खान को गिरफ्तार किया गया था और समीर वानखेड़े उस केस की जांच कर रहे थे। वानखेड़े का कहना है कि सीरीज में उन्हें परोक्ष रूप से एक भ्रष्ट अधिकारी के रूप में पेश किया गया है, जिससे उनकी पेशेवर छवि पर गहरा असर पड़ा है।
वानखेड़े की मांग और कानूनी रास्ता
वानखेड़े ने अदालत से अपील की है कि नेटफ्लिक्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स को सीरीज से संबंधित “मानहानिकारक दृश्य” हटाने या प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि जब यह मामला अभी बॉम्बे हाईकोर्ट और एनडीपीएस की विशेष अदालत में विचाराधीन है, तब इस तरह की सीरीज का प्रसारण उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
अब सबकी निगाहें 10 नवंबर पर टिकी हैं, जब दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई करेगा और यह तय करेगा कि सीरीज पर कोई रोक लगाई जाए या नहीं।














