जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। हमले के बाद से पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में जरबदस्त तरीके से ट्रॉल किया जा रहा है। एक बार फिर से उन्हें बैन की बात जोर पकड़ रही है। अब मशहूर लेखक व गीतकार जावेद अख्तर (80) ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ी है। पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान लंबे समय बाद ‘अबीर गुलाल’ फिल्म से बॉलीवुड में वापसी करने वाले थे। फिलहाल इस फिल्म को टाल दिया गया है। अख्तर ने पीटीआई के साथ बातचीत करते हुए कहा कि पहला सवाल ये है कि क्या हमें पाकिस्तानी कलाकारों को यहां बुलाना चाहिए?
इसके दो जवाब हैं, दोनों अपने-अपने तर्क में सही हैं। नुसरत फतेह अली खान, गुलाम अली, नूर जहां जैसे दिग्गज भारत आए, हमने उनका दिल खोलकर स्वागत किया। फैज अहमद फैज, जो पूरे उपमहाद्वीप के शायर हैं, जब वाजपेयी के जमाने में भारत आए, तो उन्हें सरकारी मेहमान की तरह सम्मान मिला। लेकिन अफसोस ये सम्मान कभी पाकिस्तान से वापस नहीं मिला। हमें पाकिस्तानी लोगों से कोई शिकायत नहीं है। दूसरा तर्क भी उतना ही सही है।
अगर हम पाकिस्तानी कलाकारों को रोकते हैं, तो इससे पाकिस्तान में किसे खुशी मिलती है? वहां की सेना और कट्टरपंथियों को, क्योंकि यही वो चाहते हैं। उन्हें दूरी चाहिए, ये उनके हक में है। दोनों सवाल बराबर वजन रखते हैं। अभी के लिए, मेरा जवाब है-नहीं, इन्हें नहीं बुलाना चाहिए। लता मंगेशकर जैसी महान गायिका, जिनकी लोकप्रियता पाकिस्तान में भी जबरदस्त थी, उन्होंने वहां एक भी परफॉर्मेंस क्यों नहीं दी? पाकिस्तान के बड़े शायरों ने उनके गानों के लिए लिखा। 60-70 के दशक में वो भारत-पाकिस्तान में सबसे बड़ी स्टार थीं।
फिर भी, कोई कॉन्सर्ट क्यों नहीं? मैं पाकिस्तानी लोगों से शिकायत नहीं करूंगा, वहां उन्हें प्यार मिला, लेकिन कोई रुकावट थी, शायद सिस्टम की, जो मुझे समझ नहीं आता. ये एकतरफा रास्ता है। उल्लेखनीय है कि अख्तर ने पहलगाम हमले के तुरंत बाद इसकी निंदा करते हुए अपना गुस्सा निकाला था। इसके बावजूद बहुत से लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रॉल कर उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाया था।














