
बिहार की धरती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सच्ची प्रतिभा किसी बड़े नाम या मंच की मोहताज नहीं होती। छोटे कस्बों और गांवों से निकलकर भी सपनों को साकार किया जा सकता है—बस जज़्बा और मेहनत होनी चाहिए।
भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड स्थित मुकुंदपुर गांव के रहने वाले 14 वर्षीय अजिंक्य मिश्रा ने मायानगरी मुंबई में अपने अभिनय से सबका ध्यान खींच लिया है। हाल ही में रिलीज़ हुई चर्चित बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar Movie) में उनके दमदार अभिनय की चारों ओर चर्चा हो रही है।
मूल रूप से मुकुंदपुर निवासी चंदेश्वर मिश्रा के पौत्र और जयशंकर मिश्रा के सुपुत्र अजिंक्य मिश्रा ने इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में दिग्गज अभिनेता अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए रहमान डकैत के बेटे फैजल बलोच की अहम भूमिका अदा की है। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद अजिंक्य ने अपने किरदार में जान डाल दी और दर्शकों के दिलों में जगह बना ली।
अपनी स्वाभाविक अदाकारी और भावनात्मक अभिव्यक्ति से अजिंक्य ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। भोजपुर की मिट्टी से जुड़ा यह बाल कलाकार बेहद कम समय में बॉलीवुड की चमकदार दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। उसकी इस उपलब्धि से परिवार के लोग ही नहीं, बल्कि पूरा गांव और जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
इंदौर में जन्म, बचपन से अभिनय की ओर झुकाव
अजिंक्य के दादा चंदेश्वर मिश्रा बताते हैं कि उसका जन्म इंदौर में हुआ था। बचपन से ही उसमें अभिनय के प्रति गहरी रुचि दिखने लगी थी। स्कूल के कार्यक्रमों से लेकर घर के छोटे-छोटे मंचों तक, वह हर मौके पर अभिनय करता था। धीरे-धीरे उसने तय कर लिया कि उसे अपना करियर इसी क्षेत्र में बनाना है।
शुरुआती दिनों में अजिंक्य ने मॉडलिंग से अपने सफर की शुरुआत की। इसके बाद मुंबई पहुंचकर उसने कई छोटे-बड़े विज्ञापनों में काम किया, जिससे उसकी अभिनय यात्रा को दिशा मिली। विज्ञापनों के बाद उसे टीवी सीरियल्स में काम करने का अवसर मिला और यहीं से उसका आत्मविश्वास और निखरता चला गया।
अजिंक्य के बड़े पापा विकास मिश्रा बताते हैं कि मुंबई में रहकर पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने करियर को भी संतुलित तरीके से आगे बढ़ा रहा है। फिलहाल उसके पास तीन बड़े प्रोजेक्ट्स हैं, जिनमें वेब सीरीज और फिल्में शामिल हैं, जो आने वाले समय में रिलीज़ होंगी।
पूरे भोजपुर में खुशी की लहर
अजिंक्य की इस सफलता से न सिर्फ मुकुंदपुर गांव, बल्कि पूरे भोजपुर जिले में खुशी का माहौल है। लोग गर्व से उसकी चर्चा कर रहे हैं और मानते हैं कि आने वाले वर्षों में वह बॉलीवुड के बड़े सितारों की कतार में खड़ा नजर आएगा। गांव के युवाओं के लिए वह एक नई प्रेरणा बन चुका है।
माता-पिता का मजबूत साथ बना आधार
अजिंक्य के इस सफर में उसके माता-पिता का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है। पिता जयशंकर मिश्रा, जो एक मेडिकल कंपनी में कार्यरत हैं, ने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग दिया। मां रेणुबाला मिश्रा ने भी पढ़ाई और करियर के बीच संतुलन बनाए रखने में उसका पूरा साथ निभाया। फिलहाल अजिंक्य नौवीं कक्षा का छात्र है और पढ़ाई के साथ-साथ अभिनय को भी पूरी गंभीरता से निभा रहा है।
ऐसे तय हुआ बड़े पर्दे तक का रास्ता
अजिंक्य के अभिनय करियर की शुरुआत टीवी सीरियल ‘दिल तो हैप्पी है जी’ से हुई, जहां उसकी मासूमियत और स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों और निर्देशकों का ध्यान खींचा। इसके बाद उसने फिल्म ‘राष्ट्रकवच ओम’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा।
हालांकि, आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘धुरंधर’ उसके करियर का असली टर्निंग पॉइंट साबित हुई। रणवीर सिंह, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, अक्षय खन्ना और संजय दत्त जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद अजिंक्य ने अपनी अलग पहचान कायम की।
‘धुरंधर’ में फैजल बलोच के रूप में असरदार प्रस्तुति
फिल्म ‘धुरंधर’ में फैजल बलोच का किरदार कहानी को भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। रहमान डकैत के छोटे बेटे के रूप में फैजल यह दिखाता है कि अपराध और हिंसा की दुनिया किस तरह एक मासूम बचपन को प्रभावित करती है।
कहानी में फैजल रहमान के परिवार का एक अहम हिस्सा है, जिसके इर्द-गिर्द कई भावनात्मक मोड़ बुने गए हैं। एक ओर रहमान का खौफनाक और सख्त व्यक्तित्व है, तो दूसरी ओर अपने बेटों के प्रति उसका लगाव उसके मानवीय पक्ष को उजागर करता है।
संक्षेप में कहा जाए तो फैजल का किरदार केवल रहमान की विरासत का प्रतीक नहीं है, बल्कि वह उन हालातों का आईना भी है, जो ल्यारी के गैंग वॉर के बीच पनपने वाली अगली पीढ़ी की नियति को दर्शाते हैं। अजिंक्य मिश्रा ने इस जटिल भावनात्मक किरदार को पूरी संजीदगी के साथ निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है।














