
15 अगस्त 1988 का दिन भारतीय टेलीविज़न और संगीत इतिहास में अमर हो गया। पूरे देश ने आज़ादी की वर्षगांठ हर्षोल्लास के साथ मनाई, लेकिन दूरदर्शन पर आने वाला एक विशेष गीत ने हर घर में राष्ट्रीय एकता का संदेश गूंजा दिया। इस गीत के शब्द लिखे थे भारत के एड गुरु पीयूष पांडे ने, जबकि संगीत का जादू बिखेरा पंडित भीमसेन जोशी और अशोक पटकी ने।
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ सिर्फ एक गीत नहीं था, बल्कि विविधता में एकता का प्रतीक बन गया। इसके बोल—
"मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा..."—ने हर भारतीय के दिल को छू लिया। यह गीत 14 भाषाओं में गाया गया, जिसमें हिंदी, तमिल, तेलुगू, कश्मीरी, असमी, पंजाबी, सिन्धी, उर्दू, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, ओडिया, गुजराती और मराठी शामिल थीं।
गीत में केवल शब्द और संगीत ही नहीं, बल्कि स्क्रीन पर दिखी हस्तियों और खिलाड़ियों की विविधता ने इसे और भी खास बना दिया। अमिताभ बच्चन, वहीदा रहमान, शर्मिला टैगोर, हेमा मालिनी, जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, तनूजा, शबाना आजमी जैसे फिल्मी सितारे, और सुनील गावस्कर, पीटी उषा, कपिल देव, प्रकाश पादुकोण, मिल्खा सिंह जैसे खेल के दिग्गज इस गीत में नजर आए। इसने पहली बार राष्ट्रीय एकता के संदेश को मनोरंजन और लोकप्रिय संस्कृति के साथ जोड़ा।
पीयूष पांडे ने इस गीत को अपने जीवन का सबसे यादगार काम माना। उनके अनुसार इस अभियान में शामिल होने वाले कई लोगों की भागीदारी और 17 ड्राफ्ट्स के बाद अंततः 18वां ड्राफ्ट ही स्वीकृत हुआ। यह गीत न केवल दूरदर्शन के दर्शकों को जोड़ने में सफल रहा, बल्कि यह संदेश भी दिया कि जब हम सब मिलकर काम करेंगे, तो राष्ट्र के रूप में हम और भी मजबूत बन सकते हैं।
आज, 24 अक्टूबर 2025 को, पीयूष पांडे ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनका काम—चाहे वह विज्ञापन जगत हो या देशभक्ति का यह ऐतिहासिक गीत—हमेशा गूंजता रहेगा। ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ आज भी हर भारतीय के दिल में एक प्रेरणा और राष्ट्रीय एकता की धड़कन के रूप में जीवित है।














