
रविवार की रात एक खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसे लेकर लोगों में जिज्ञासा के साथ-साथ कुछ भ्रम भी है। यह घटना है साल 2025 का दूसरा और अंतिम सूर्यग्रहण, जो 21 सितंबर की रात 10 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 22 सितंबर की भोर 3 बजकर 22 मिनट तक जारी रहेगा। हालांकि, भारतीय उपमहाद्वीप में यह दृश्य रूप से नहीं देखा जा सकेगा, क्योंकि यह ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका जैसे क्षेत्रों में आंशिक रूप में दिखेगा।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चूंकि यह ग्रहण भारत में दृष्टिगोचर नहीं होगा, इसलिए सूतक काल की मान्यता भी इस बार लागू नहीं मानी गई है। फिर भी ग्रहों की इस चाल का कुछ राशियों पर आंशिक प्रभाव अवश्य देखा जा सकता है, और यही कारण है कि यह ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
सूर्य ग्रहण का प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग ढंग से पड़ेगा। कुछ राशियों के लिए यह ग्रहण सकारात्मक ऊर्जा और नए अवसरों का संकेतक है, वहीं कुछ राशियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
सिंह राशि वालों के लिए यह दिन अच्छा माना गया है। उनके लिए यह समय आत्मविश्वास, सफलता और तरक्की के नए द्वार खोल सकता है। ग्रहों की स्थिति उन्हें साहस के साथ निर्णय लेने की शक्ति प्रदान कर रही है। वहीं दूसरी ओर तुला, मिथुन, वृषभ और कन्या राशि वालों को दिनभर सतर्कता और संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से तुला राशि वालों को अपने पारिवारिक रिश्तों और आर्थिक मामलों में सजग रहने की आवश्यकता है, वरना परिस्थितियां उनके विपरीत जा सकती हैं।
कन्या राशि के जातकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी नए कार्य में हाथ डालने से पहले सोच-विचार करें। भावनात्मक अस्थिरता या जल्दबाज़ी उन्हें नुकसान की ओर ले जा सकती है। इसी तरह मिथुन राशि के लिए यह ग्रहण मनोबल और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है, इसलिए उनसे कहा गया है कि वे अनावश्यक चिंताओं और गुस्से से दूरी बनाए रखें।
वृषभ राशि के लोगों के लिए यह ग्रहण आर्थिक मामलों में विशेष ध्यान देने की चेतावनी देता है। कोई भी निवेश या निर्णय बिना विचार-विमर्श के न लें, क्योंकि यह समय छोटे-छोटे फैसलों में भी बड़ी भूल करवा सकता है।
वहीं, मेष राशि वालों के लिए यह ग्रहण एक शुभ संकेत है। उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ रह सकती है और उन्हें कुछ अप्रत्याशित अवसर भी मिल सकते हैं। वृश्चिक राशि के जातकों को भी यह ग्रहण सहयोग और टीम वर्क के महत्व को समझने का अवसर दे सकता है। अगर उन्होंने कोई अधूरी योजना छोड़ रखी है तो उसे पुनः प्रारंभ करने का यह उपयुक्त समय हो सकता है।
मीन राशि के लिए यह ग्रहण विशेष रूप से साझेदारी, अनुबंध और संबंधों को प्रभावित करने वाला है। चाहे वह पारिवारिक रिश्ते हों या व्यवसायिक साझेदारी, पारदर्शिता और स्पष्ट संवाद इस समय सबसे ज्यादा जरूरी बन जाते हैं। उन्हें सलाह दी गई है कि वे अपने संबंधों में संतुलन और आपसी समझ बनाए रखें।
आध्यात्मिक दृष्टि से भी यह ग्रहण विशेष माना गया है। आस्था, धर्म, शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर उन्मुख होना इस काल का एक सकारात्मक पहलू हो सकता है। यदि मन में किसी प्रकार की उलझन या द्वंद्व हो, तो उसे टालने के बजाय अपने विचारों को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करें।
ग्रहण के दौरान मानसिक शांति और ऊर्जा संतुलन बनाए रखने के लिए 'ॐ ह्रीं घृणि सूर्य आदित्याय श्रीं' मंत्र का जप करने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। यह मंत्र सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है और व्यक्ति को मानसिक रूप से स्थिर रखने में सहायक होता है।
संक्षेप में कहें तो यह सूर्यग्रहण भले ही भारत में दृश्य रूप से न दिखाई दे, लेकिन इसकी ज्योतिषीय छाया कुछ राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रही है, वहीं कुछ के लिए यह आत्मविश्लेषण और सावधानी बरतने का समय है। ग्रहों की यह चाल हमें एक बार फिर से याद दिलाती है कि आकाश में जो घट रहा है, वह हमारे जीवन की भूमि पर असर जरूर डालता है।














