
शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म में माता दुर्गा के सम्मान में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, उपवास रखे जाते हैं और गरबा व डांडिया जैसे पारंपरिक नृत्य आयोजित किए जाते हैं। नवरात्रि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और जीवन में शुद्धता, शक्ति व सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है।
नवरात्रि के बाद पूजन सामग्री का उपयोग
नवरात्रि खत्म होने के बाद अक्सर लोग सोचते हैं कि बची हुई पूजा सामग्री का क्या किया जाए। इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना न सिर्फ परंपरा का पालन है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में भी सहायक होता है।
जली हुई बाती
बची हुई बाती को कपूर और लौंग के साथ जलाएं। इससे बनी राख को घर के कोनों में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। आप इसे पौधों में डालकर भी उसका सदुपयोग कर सकते हैं।
कलश का जल
कलश में रखा जल घर के हर कोने में छिड़कें। बचा हुआ जल तुलसी के पौधे में डालें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और पौधे भी स्वस्थ रहते हैं।
नारियल
कलश से निकाला गया नारियल प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है या धन स्थान में रखा जा सकता है।
सिक्के और चावल
कलश में रखे सिक्कों को अपने पर्स में रख सकते हैं और चावल को तिजोरी या धन स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। इससे घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
पूजन सामग्री का विसर्जन या दान
नदी में प्रवाहित करना
बची हुई फूल, धूप या अन्य सामग्री को नदी में प्रवाहित किया जा सकता है। यह परंपरा शुद्धिकरण का प्रतीक है।
पवित्र स्थान पर रखना
यदि नदी में प्रवाहित करना संभव न हो, तो इसे पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे सम्मानपूर्वक रख सकते हैं।
जरूरतमंदों को दान
बची हुई कपड़े, मिठाई या अन्य सामग्री जरूरतमंदों को दान में दी जा सकती है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और सामग्री का सदुपयोग भी हो जाता है।














