
सावन का पावन माह चल रहा है, जो संपूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है। इस माह में शिवभक्त व्रत, पूजा और जलाभिषेक द्वारा भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। सावन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव के आध्यात्मिक और भौतिक कृपा को पाने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन जब यह तिथि सावन के पवित्र माह में आती है, तो इसका पुण्य और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन चार प्रहरों में शिव पूजन विशेष फलदायी होता है और संतान सुख, सुख-शांति, आरोग्यता और वैवाहिक सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शिवालयों में आज के दिन विशेष श्रृंगार, मंत्रोच्चार, भजन कीर्तन और जलाभिषेक की दिव्यता देखने को मिलती है। भक्तगण रात्रि जागरण कर भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं। शिव को "आशुतोष" कहा गया है क्योंकि वे अल्प प्रयास से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।
शिव पूजा की विधि: कैसे करें भगवान शिव का पूजन?
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर या मंदिर में दीप जलाएं।
- शिवलिंग का गंगा जल, दूध, दही, घृत, शहद और शुद्ध जल से पंचामृत अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
- भगवान गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय और नंदी का पूजन भी साथ में करें।
- "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
- शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करें।
- अंत में आरती करें और भोग लगाएं।
शिवरात्रि पूजा के चार प्रहर और विशेष सामग्री:
चार प्रहर की पूजा का समय (23-24 जुलाई 2025):
प्रहर समय
रात्रि प्रथम प्रहर 07:17 PM – 09:53 PM
रात्रि द्वितीय प्रहर 09:53 PM – 12:28 AM
रात्रि तृतीय प्रहर 12:28 AM – 03:03 AM
रात्रि चतुर्थ प्रहर 03:03 AM – 05:38 AM
निशीथ काल पूजा मुहूर्त: 12:07 AM से 12:48 AM
शिवरात्रि पारण: 24 जुलाई, सुबह 05:38 बजे
पूजा सामग्री सूची:
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगा जल)
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प
- कपूर, धूप, दीप, रूई, इत्र
- पूजा बर्तन, मौली, रत्न, चांदी/सोना (सांकेतिक)
- पंच फल, पंच मिष्ठान्न, आम्र मंजरी, बेर, गाय का दूध
- जौ की बालें, मंदार पुष्प, तुलसी, चंदन, जल पात्र
- श्रृंगार सामग्री माता पार्वती के लिए
पौराणिक व ज्योतिषीय पक्ष:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन की शिवरात्रि वह रात्रि है जब माता पार्वती ने कठिन तप के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। अतः यह दिन वैवाहिक जीवन की सफलता, सौभाग्य और नारी मनोकामना की पूर्ति का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार शिवरात्रि बुध के दिन है, जो बुद्धि, व्यापार और संवाद का प्रतिनिधित्व करता है। यह दिन जीवन में संतुलन, विकास और आध्यात्मिक उन्नति के लिए शुभ है।
विशेष जानकारी: स्वास्थ्य, मनोकामना और दोषों से मुक्ति
कालसर्प दोष, पितृ दोष, शनिदोष जैसी बाधाओं से मुक्ति हेतु यह दिन अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
निर्जला व्रत और दिवसभर उपवास रखने से आत्मिक शुद्धि होती है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया रुद्राभिषेक सभी पापों का नाश करता है और आत्मा को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।














