
इस समय पूरा देश भक्ति भाव में डूबा हुआ है क्योंकि सावन का पावन महीना चल रहा है। आज सावन का पहला सोमवार है और यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शंकर को समर्पित माना गया है, और मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव स्वयं धरती पर विचरण करते हैं। इसलिए इस अवसर पर की गई पूजा- अर्चना भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करने वाली मानी जाती है।
भगवान शिव की सच्चे मन से की गई पूजा न सिर्फ मन को शांति देती है, बल्कि जीवन में छाए तमाम संकटों को भी दूर करती है। खासकर उन लोगों के लिए यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जो शनि साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव में हैं। शनि के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति का जीवन मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सावन के पहले सोमवार का दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर बन जाता है।
किस राशि पर है शनि का प्रभाव?
वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती कुंभ, मीन और मेष राशि वालों पर चल रही है, जबकि सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या का असर है। जो लोग इस प्रभाव से पीड़ित हैं, उनके जीवन में कई चुनौतियाँ आती हैं—मानसिक तनाव, धन हानि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ और रिश्तों में खटास जैसी समस्याएं घेर सकती हैं।
इन राशियों के जातक आज करें ये उपाय
अगर आप भी शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित हैं, तो आज सावन के पहले सोमवार पर ये विशेष उपाय जरूर करें:
1. भगवान शंकर को जल अर्पित करें
सावन सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। यह एक सरल परंतु बेहद प्रभावशाली उपाय है जिससे भगवान शंकर शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
– गंगाजल से अभिषेक करें: हिंदू धर्म में गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना गया है। शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से मन शांत होता है और शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।
– मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव रखें: जब आप शिवलिंग पर जल अर्पित करें, तब अपने भीतर आस्था का भाव जगाएं। यह केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि आत्मा की गहराई से की गई पुकार होनी चाहिए।
2. लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करें
जल या गंगाजल अर्पित करने के बाद लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। इस स्तोत्र का जाप मन को स्थिर करता है और भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
लिंगाष्टकम का नियमित पाठ शिव कृपा को आकर्षित करता है, जिससे जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति मिलने लगती है। यह स्तोत्र भगवान शिव के लिंग स्वरूप की महिमा का वर्णन करता है और उनके हर रूप को श्रद्धा से नमन करता है।
लिंगाष्टकम स्तोत्र
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥1॥
देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥2॥
सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥3॥
कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥4॥
कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥5॥
देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥6॥
अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।
अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥7॥
सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥8॥
लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥
3. मन से प्रार्थना करें – शनि के प्रभाव से मुक्ति की विनती करें
उपाय करने के साथ-साथ भगवान शिव से मन से विनती करें कि वे शनि के प्रभाव से आपकी रक्षा करें। याद रखें, सिर्फ कर्म करना ही काफी नहीं, आस्था और समर्पण भी उतना ही जरूरी होता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।














