आज हैं श्राद्ध पक्ष का प्रदोष व्रत, शिव के इन उपायों से पितरों को करें तृप्त

By: Ankur Fri, 23 Sept 2022 07:41 AM

आज हैं श्राद्ध पक्ष का प्रदोष व्रत, शिव के इन उपायों से पितरों को करें तृप्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष दोनों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता हैं जो कि शिव को समर्पित होता हैं। इस दिन भगवान शिव की उपासना से जीवन में चल रही तमाम समस्याओं का निपटारा हो सकता है। इस समय श्राद्ध पक्ष चल रहा हैं और आज 23 सितंबर को प्रदोष व्रत हैं। शुक्रवार के दिन यह व्रत पड़ने के कारण यह शुक्र प्रदोष कहलाता है। पितृ पक्ष में यह व्रत आने के कारण इसका अधिक महत्व बढ़ जाता है। इस दिन पितरों और शिव भगवान की पूजा करनें से विशेष फल प्राप्त होता हैं। आज हम आपको कुछ उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें करने से पितरों की तृप्ति के साथ ही भगवान शिव के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होगा।

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शुक्र प्रदोष व्रत की पूजन विधि

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के मंदिर जाकर उनकी पूजा करना उत्तम होता है। इस दिन भगवान शिव को अक्षत, फल, फूल, मिठाई अर्पित करें। उनकी आरती उतारें और मंत्रों का जाप करें। इस दिन शिवजी को भांग, धतूरा, बेलपत्र और रूद्राक्ष अर्पित करने से जीवन की हर मनोकामना पूरी की जा सकती है। पूजा के बाद भगवान शिव से अपने जीवन के संकट दूर करने की प्रार्थना करें।

श्राद्ध प्रदोष व्रत के उपाय

- प्रदोष या त्रयोदशी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान भोलेनाथ का ध्यान करते हुए नहाने के पानी में काले तिल डाल कर मंत्र- 'ॐ नम: शिवाय' का जाप करते हुए स्नान करें। शिव जी तथा पितृ प्रसन्न होंगे।

- प्रदोष व्रत के दिन कच्चा दूध लेकर उसमें काले तिल डालकर मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव जी का अभिषेक करें तथा काले तिल का दान करें। इस उपाय से पितृ दोष से मुक्ति मिलने के साथ ही पितरों की आत्मा को शांति भी मिलेगी तथा उनके आशीर्वाद से चारों दिशाओं में आपकी यश, कीर्ति बढ़ेगी तथा धनागमन के रास्ते खुलेंगे।

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- भगवान शिव की तस्वीर या प्रतिमा के समक्ष बैठकर या घर में ही भगवान भोलेनाथ का ध्यान कर मंत्र ( 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।') की माला का जाप करने से पितृदोष में राहत के साथ ही शुभत्व की भी प्राप्ति होती है। इस मंत्र का जाप हर रोज एक निश्चित समय पर सुबह या शाम के समय करना चाहिए।

- त्रयोदशी के दिन किसी भी तालाब या नदी किनारे जाकर मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने तथा असहाय लोगों को भोजन कराने अथवा अन्न, वस्त्र, काले तिल, छाता आदि दान करने से भी पि‍तृ प्रसन्न होंगे।

- प्रदोष तिथि पर शिव-पार्वती का संयुक्त रूप में पूजन करके मंत्र- 'ॐ गौरीशंकराय नमः' का जाप करें तथा किसी मंदिर में अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करें। इस उपाय से जहां पितरों का आशीष मिलेगा, वहीं जीवन की सभी परेशानियां दूर होकर सुख-समृद्धि और घर में खुशियों का आगमन होगा।

आज करें निम्न मंत्रों का जाप

- ॐ पितृ देवतायै नम:
- ॐ कुलदेवतायै नम:
- ॐ कुलदैव्यै नम:

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