
इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा, जो कि शनिवार के दिन पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन श्रावण पूर्णिमा दोपहर 1 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। पूर्णिमा का व्रत हालांकि एक दिन पहले यानी 8 अगस्त को दोपहर 2:13 बजे से शुरू हो जाएगा, लेकिन बहनों द्वारा भाई की कलाई पर राखी बांधने का शुभ कार्य 9 अगस्त को ही किया जाएगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्ध योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन और भी पवित्र हो गया है।
अभिजीत मुहूर्त में राखी बांधना रहेगा विशेष रूप से लाभकारी
पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 9 अगस्त को रक्षाबंधन के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला प्रात: 7:45 बजे से 9:27 बजे तक रहेगा जबकि दूसरा दोपहर में 12:17 बजे से 1:09 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त है। इन समयों में राखी बांधना अत्यंत शुभ माना जा रहा है, क्योंकि इस समय ग्रहों की स्थिति शुभ फलदायक रहती है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन सौभाग्य योग और श्रवण नक्षत्र भी मौजूद रहेंगे, जो पर्व की पवित्रता को और बढ़ाते हैं।
शनिवार को रक्षाबंधन का संयोग—शनि दोष से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
इस बार रक्षाबंधन शनिवार को होने के कारण शनि ग्रह की उपस्थिति विशेष महत्व रखती है। पंडितों का मानना है कि शनि ग्रह के प्रभाव से इस दिन भाई-बहन के संबंधों में मानसिक अशांति, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और पारिवारिक तनाव उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के दौरान कुछ विशेष उपाय करने से शनि के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
बहनों को अपने भाई को राखी बांधने से पहले काले धागे से रक्षा सूत्र बांधना चाहिए और माथे पर काला टीका लगाना चाहिए। इसके अतिरिक्त एक राखी भगवान शनिदेव को समर्पित करके रखनी चाहिए और फिर भाई को राखी बांधनी चाहिए। यह उपाय शनि दोष से रक्षा करता है और भाई की दीर्घायु व आरोग्यता सुनिश्चित करता है।
काले वस्त्र और पकोड़े से बढ़ेगा शुभ फल
रक्षाबंधन के दिन शनि दोष निवारण के लिए काली वस्तु जैसे काला कपड़ा, काले तिल, काला चना या काला उड़द भाई के नाम पर दान करना भी शुभ माना गया है। इसके साथ ही, तेल के बने मीठे और नमकीन पकोड़े बनाकर भाई को खिलाने और परिवारजनों में बांटने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। ये उपाय रक्षाबंधन के दिन भाई के दीर्घायु जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं।
श्रावणी पर्व के साथ मिलेगा पुण्य फल
रक्षाबंधन के साथ-साथ इस दिन श्रावणी उपाकर्म का पर्व भी मनाया जाता है। विशेषकर ब्राह्मण वर्ग के लोग इस दिन यज्ञोपवीत बदलते हैं और वेदपाठ करते हैं। यह पर्व ज्ञान, धर्म और परंपरा से जुड़ा होता है। इस दृष्टि से 9 अगस्त का दिन धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ और पुण्यफलदायी रहेगा।
ध्यान दें इन बातों पर
राखी बांधने से पहले पूर्णिमा का तिथि और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि किसी कारणवश बहन भाई को समय से नहीं बांध पाए तो उन्हें अगले दिन या गलत समय पर राखी बांधने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शुभ फल की बजाय दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। साथ ही शनि की विशेष स्थिति को देखते हुए उपाय करना न भूलें, क्योंकि इस वर्ष का रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का पर्व नहीं, बल्कि ग्रहों के विशेष संयोग के कारण भी विशेष है।
रक्षाबंधन 2025 का पर्व ग्रह-नक्षत्रों की दृष्टि से काफी विशेष बन गया है। शनिवार को आने वाला यह त्यौहार कुछ सावधानियों और उपायों के साथ मनाया जाए तो भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूती देने वाला सिद्ध हो सकता है। धर्म, परंपरा और ज्योतिष की दृष्टि से यह पर्व केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भावनाओं और ऊर्जा का पर्व है जिसे श्रद्धा और समझदारी से मनाना चाहिए।














