
25 अगस्त सोमवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है और सोमवार का दिन सिद्ध योग के साथ बेहद खास बन गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवार दोपहर 12 बजकर 06 मिनट तक सिद्ध योग रहेगा। यह योग किसी भी कार्य को सफल बनाने और प्रभु का नाम जपने के लिए उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए कार्यों का शुभ परिणाम अवश्य मिलता है। इसी विशेष अवसर पर कुछ आसान उपाय बताए गए हैं, जिनके जरिए व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों से छुटकारा पा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता चाहता है, तो सोमवार को जरूरतमंद को तांबा, गुड़, गेहूं या मसूर दान करने के साथ सिर पर सफेद टोपी या पगड़ी धारण करे। स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाने के लिए मंदिर में सवा किलो अन्न और सफेद नमक का दान करना शुभ माना गया है। वहीं, जीवनशैली में सुधार लाने के लिए लाल फूल वाले पौधे में जल अर्पित कर सूर्यदेव को प्रणाम करना चाहिए।
दांपत्य जीवन में मधुरता बनाए रखने के लिए सोमवार की रात सोने से पहले सिरहाने के पास कपूर और रोली रखें। सुबह उठकर कपूर को घर के बाहर जलाएं और रोली को जल अर्पण कर सूर्यदेव को समर्पित करें। आर्थिक पक्ष मजबूत करने के लिए तांबे के लोटे में जल, गेहूं और लाल फूल डालकर सूर्य को अर्पित करना लाभकारी माना गया है।
व्यापार में लाभ के लिए नया काम शुरू करने से पहले दो सफेद फूल पास रखें और कार्य पूर्ण होने के बाद उन्हें बहते जल में प्रवाहित करें। वहीं, जो लोग पिता से आर्थिक सहयोग पाना चाहते हैं, वे ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः’ मंत्र का 11 बार जाप करें और पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
व्यवसायिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए गाय को बाजरे की रोटी खिलाएं और किसी ब्राह्मण को सवा किलो गेहूं दान करें। नौकरी में मनचाहा ट्रांसफर पाने के लिए सूर्य को बाजरे के दाने मिले जल से अर्घ्य अर्पित करें और मंत्र जाप करें। प्रमोशन की इच्छा रखने वाले लोग बहते जल में लाल चंदन और लाल फूल प्रवाहित करें और माथे पर लाल चंदन का तिलक लगाएं।
प्रेम विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मंदिर में तांबे की वस्तु दान करना और पुजारी से आशीर्वाद लेना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन उपायों को सिद्ध योग में करने से जीवन की अनेक कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं और व्यक्ति को सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।














