
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो चुका है। यह समय शक्ति, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा अपने भक्तों की सभी बाधाएं दूर कर उन्हें सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देती हैं। नवरात्रि के दौरान भक्त देवी के अलग-अलग रूपों की आराधना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रार्थना करते हैं। एक खास परंपरा यह भी है कि हर दिन के अनुसार अलग-अलग रंग के वस्त्र धारण किए जाते हैं। माना जाता है कि इन रंगों को पहनने से देवी मां विशेष प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा भक्तों पर निरंतर बनी रहती है।
पहले और दूसरे दिन के रंग
नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि उन्हें नारंगी रंग अत्यधिक प्रिय है। इसीलिए भक्त इस दिन नारंगी परिधान धारण करते हैं। ऐसा करने से मां शैलपुत्री प्रसन्न होकर साधकों को साहस और ऊर्जा का आशीर्वाद देती हैं। दूसरे दिन की पूजा मां ब्रह्मचारिणी के लिए होती है। सफेद रंग उनकी पसंद का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सफेद वस्त्र पहनने से शांति, पवित्रता और आत्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
तीसरे दिन का महत्व और मां चंद्रघंटा की आराधना
नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। मां का यह रूप वीरता और करुणा का प्रतीक है। सनातन परंपरा के अनुसार, इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना सबसे शुभ होता है। लाल रंग शक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है और मां चंद्रघंटा को अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि इस दिन लाल रंग धारण करने वाले भक्तों के जीवन में मां हर तरह की खुशहाली और सौभाग्य का संचार करती हैं।
तीसरे दिन की पूजा और भोग
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि में विशेष महत्व भोग का है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीसरे दिन मां को खीर का भोग अर्पित किया जाता है। ऐसा करने से मां अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं और जीवन से संकटों का निवारण करती हैं। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने पर मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस, आत्मबल और विजय का वरदान प्रदान करती हैं।














