
आखिरकार वह शुभ अवसर आ ही गया जिसका इंतजार भक्तों को पूरे साल रहता है। आज गणेश चतुर्थी है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन आज देश के हर कोने में इसकी झलक देखने को मिल रही है। गणेश चतुर्थी के दिन घर-घर में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है। कुछ भक्त पूजा के एक दिन पहले ही बप्पा को घर लाकर उनकी विधिवत पूजा शुरू कर देते हैं।
पूजा सामग्री और भोग: क्या रखें जरूरी?
गणपति बप्पा की पूजा में चढ़ाए जाने वाले सामान को लेकर अक्सर लोगों को थोड़ी उलझन रहती है। हालांकि, गणेश चतुर्थी की पूजा सामग्री बेहद सरल और आसानी से उपलब्ध होती है। खासकर पांच चीजें ऐसी हैं जिन्हें बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। ये वही चीजें हैं जो मोदक की तरह ही भगवान गणेश को बेहद प्रिय हैं।
भगवान गणेश की पसंदीदा चीजें
मोदक और मोतीचूर लड्डू गणपति भोग में सबसे अधिक महत्व रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोदक का भोग रखने से भगवान गणेश अपनी असीम कृपा बरसाते हैं। इसके अलावा पांच चीजें हैं जो हर गणेश चतुर्थी पूजा में अनिवार्य रूप से रखी जानी चाहिए।
दूर्वा – भगवान गणेश की अति प्रिय चीज़।
गुड़हल का फूल – पूजा में शुभता और सुंदरता बढ़ाता है।
नारियल – समर्पण और शुद्धता का प्रतीक।
चावल – अनंत खुशियों और समृद्धि का संकेत।
गुड़ – पूजा में मिठास और सौभाग्य लाता है।
इन सभी चीजों को पूजा में शामिल करने से न केवल विधिपूर्वक आराधना होती है बल्कि भगवान की कृपा भी अधिक प्राप्त होती है।
गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 27 अगस्त को पड़ रही है। गणपति पूजा का शुभ मुहूर्त आज 11 बजकर 5 मिनट से लेकर 1 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस समय में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
भक्त अपनी श्रद्धा और समयानुसार गणपति की मूर्ति की सेवा डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिन तक कर सकते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद 6 सितंबर को विधिपूर्वक गणेश जी का विसर्जन किया जाता है।
इस गणेश चतुर्थी, पूजा में मोदक और ऊपर बताई गई पांच प्रमुख चीजों को शामिल करके अपने घर और जीवन में सुख, समृद्धि और आशीर्वाद की बहार लाएं।














