
चंद्र ग्रहण एक ऐसी खगोलीय घटना है, जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों से लेकर आधुनिक विज्ञान तक मिलता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे राहु और केतु से जोड़कर देखा जाता है। राहु और केतु को छाया ग्रह कहा गया है और इन्हें सांप की भांति प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है। मान्यता है कि जब राहु और केतु चंद्रमा को निगलने का प्रयास करते हैं, तब चंद्र ग्रहण होता है। प्राचीन काल में लोग इसे अमंगल और अपशकुन की दृष्टि से देखते थे और इससे बचने के लिए धार्मिक उपाय भी अपनाते थे।
वैज्ञानिक दृष्टि से, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुँच पाता, तब यह खगोलीय घटना घटित होती है। इस बार का ग्रहण विशेष होगा क्योंकि इसमें ब्लड मून दिखाई देगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में चला जाता है और लालिमा लिए हुए चमकता है, जिसे "ब्लड मून" कहा जाता है।
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भाद्रपद माह की पूर्णिमा को 7 सितंबर 2025 की रात को लगेगा। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा और 8 सितंबर की सुबह 01 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। इस ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट रहेगी। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा।
आसमान में दिखेगा ब्लड मून
7 सितंबर को लगने वाला ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण को ही ब्लड मून कहा जाता है। यह ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह धरती की छाया में आ जाएगा। जब चंद्रमा पूरी तरह से धरती की छाया में होता है, तो उसका रंग हल्का लाल या नारंगी हो जाता है। जिस वजह से इसे ब्लड मून कहते हैं।
भारत में दिखाई देगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। यह ग्रहण एशिया, यूरोप, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर में भी दिखाई देगा।
मान्य होगा सूतक काल
भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, जिस वजह से सूतक काल भी मान्य होगा। चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है। सूतक के दौरान किसी भी तरह के धार्मिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी लग जाते हैं।














