
7 सितंबर 2025 को भाद्रपद पूर्णिमा की रात साल का अंतिम और दूसरा चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। यह खग्रास चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल को अशुभ समय माना जाता है, जब राहु और चंद्रमा का विशेष योग बनता है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है और जीवन पर अशुभ प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में मंत्रोच्चार और देवी-देवताओं का स्मरण करने से मानसिक शांति मिलती है और दुष्प्रभावों में कमी आती है।
कौन से मंत्र जपें
धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि चंद्रग्रहण के समय विशेष मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी होता है। भगवान शिव को समर्पित महामृत्युंजय मंत्र—
‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।’
का 108 बार जप करना चाहिए।
इसके साथ ही चंद्रमा का बीज मंत्र—
‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः।’
का भी 108 बार जाप करना शुभ माना गया है।
जो लोग मानसिक अशांति या भय महसूस करते हैं, उनके लिए इस समय हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इन मंत्रों से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और आत्मबल बढ़ता है।
ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व
यह चंद्रग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है और उस समय चंद्रमा पूर्वाभाद्रपद व शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। खग्रास चंद्रग्रहण का समय रात्रि 9:57 बजे से 1:26 बजे तक रहेगा। इस खगोलीय घटना को ‘ब्लड मून’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग लालिमा लिए होगा।
सूतक काल और परंपराएं
चंद्रग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि धारदार वस्तुओं का प्रयोग और बाहर निकलना इस समय टालना चाहिए।
ग्रहण काल को यद्यपि अशुभ माना जाता है, लेकिन इस समय मंत्र जाप और भक्ति से दैवीय शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि ग्रहों के दुष्प्रभाव भी काफी हद तक कम हो जाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इनका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।














