
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला कजरी तीज का पर्व हर साल सुहागिनों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन शिव-पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा होती है और मान्यता है कि इस व्रत से पति की दीर्घायु के साथ दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है। अविवाहित युवतियां भी यह व्रत अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए करती हैं। इस वर्ष कजरी तीज 12 अगस्त 2025, मंगलवार को पड़ रही है। यह व्रत दो तरीकों से रखा जाता है—निराहार और फलाहार। आइए जानें इस व्रत में किन चीज़ों का सेवन करना उचित है और किनसे दूरी बनाए रखना जरूरी है।
कजरी तीज व्रत में क्या खा सकते हैं
कई महिलाएं इस व्रत को पूर्ण उपवास के रूप में निभाती हैं, जिसमें पूरे दिन अन्न या कोई भी भोजन नहीं लिया जाता। वहीं, कुछ महिलाएं फलाहार करती हैं, जिसमें सीमित और सात्विक आहार शामिल होता है। फलाहार में आप ताजे फल जैसे सेब, अनार, केला, साथ ही दूध, दही, मखाने, सूखे मेवे और हल्की मिठाई का सेवन कर सकती हैं। व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए समय-समय पर थोड़ी मात्रा में पानी पीना भी आवश्यक है। इससे ऊर्जा बनी रहती है और दिनभर का उपवास सहजता से पूरा हो सकता है।
कजरी तीज व्रत में किन चीज़ों से बचें
इस व्रत के दौरान अन्न का सेवन निषिद्ध है। इसमें दाल, रोटी, चावल, हरी सब्जियां आदि शामिल हैं। इसके अलावा, प्याज और लहसुन का उपयोग भी वर्जित है। मांसाहार और मदिरा का सेवन इस दिन पूरी तरह त्यागना चाहिए। कई परंपराओं में तो इस व्रत में नमक भी नहीं खाया जाता, ताकि उपवास का शुद्ध स्वरूप बना रहे।
व्रत का धार्मिक महत्व
कजरी तीज मुख्य रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत पति-पत्नी के संबंधों को मजबूत करता है और पारिवारिक जीवन में मिठास भरता है। इसके साथ ही, इसे संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए भी विशेष रूप से किया जाता है। इस दिन की पूजा और व्रत से घर में सुख-समृद्धि के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।














