
गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीवन और समृद्धि के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर भी है। इस दिन सच्चे मन और भक्ति भाव से पूजा, अन्नकूट अर्पण और दान-पुण्य करने से घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है।
गोवर्धन पूजा में करने योग्य कार्य:
सबसे पहले, गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का निर्माण करें और उसे फूलों, दीपों और 56 प्रकार के भोग या विभिन्न व्यंजनों से सजाएँ। यह अन्नकूट पर्व का मुख्य आकर्षण है।
- गौमाता की पूजा करें और उन्हें गुड़-चना खिलाएं।
- घर, आंगन और मंदिर में दीप जलाएं।
दान करें—आवश्यकतानुसार अन्न, वस्त्र या धन का वितरण करें।
- परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करें, इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
गोवर्धन पूजा में न करने योग्य बातें:
- गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा को पैर न लगाएँ।
- परिवार में विवाद या अपशब्द न बोलें।
- भोजन को व्यर्थ न जाने दें।
- किसी जानवर या गोमाता को चोट या हानि न पहुँचाएँ।
- किसी से कर्ज न लें और कठोर व्यवहार से बचें।
- पूजा हमेशा खुले स्थान या आंगन में करें; बंद कमरे में करने से ऊर्जा का संचार बाधित हो सकता है।
गाय पूजन का महत्व:
गोवर्धन पूजा के दिन गौमाता की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। उनकी सेवा और सम्मान करने से भगवान श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा में अंतर:
दोनों एक ही पर्व के अलग पहलू हैं। “गोवर्धन पूजा” भगवान कृष्ण की आराधना का नाम है, जबकि “अन्नकूट” उस दिन भगवान को अर्पित किए जाने वाले अन्न-पर्वत का प्रतीक है।
दीप जलाने का महत्व:
शाम के समय घर और मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना गया है। यह न केवल सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, बल्कि समृद्धि और खुशहाली लाने वाला भी माना जाता है।














