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30 मार्च से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्र, 9 नहीं 8 दिन रखे जाएंगे व्रत, जानिये घट स्थापना का शुभ मुहूर्त व महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 30 मार्च से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2082 की शुरुआत होगी। इस दिन सर्वार्थ अमृत सिद्धियोग बन रहा है और सूर्य को वर्ष के राजा का दर्जा मिला है। चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी इस दिन से होगा, जिसमें मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाएगी। विशेष मुहूर्त में कलश स्थापना और पूजा विधि के बारे में जानकारी प्राप्त करें।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Fri, 28 Mar 2025 4:04:22

30 मार्च से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्र, 9 नहीं 8 दिन रखे जाएंगे व्रत, जानिये घट स्थापना का शुभ मुहूर्त व महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 30 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2082 का आरंभ होगा। इस दिन सर्वार्थ अमृत सिद्धियोग बन रहा है। रविवार से नववर्ष का आरंभ होने से इस वर्ष के राजा सूर्य होंगे। नवग्रहों के मंत्रिमंडल में वर्ष के मंत्री का भी पद सूर्य को ही प्राप्त हुआ है।

नवरात्रि पूरे भारत में एक बहुप्रतीक्षित उत्सव है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत की नौ रातों को चिह्नित करता है, जिसका समापन दसवें दिन जीत के साथ होता है। उत्सव की शुरुआत नवरात्रि घटस्थापना से होती है, जिसे नवरात्रि कलश स्थापना के रूप में भी जाना जाता है। इन 9 दिनों के दौरान, माँ दुर्गा को शक्ति, जीवन शक्ति और ज्ञान के अवतार के रूप में पूजा जाता है। शक्ति की देवी के रूप में, उनकी पूजा बहुत उत्साह के साथ की जाती है, और माना जाता है कि उनकी उपस्थिति भक्तों के लिए सकारात्मकता और समृद्धि लाती है। इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि 30 मार्च 2025 को शुरू होगी और 6 अप्रैल 2025 को समाप्त होगी।

नवरात्रि हिन्दू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है, जो विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। यह पर्व हर साल हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नवमी तिथि पर इसकी समाप्ति होती है। साल 2025 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से हो रही है। हालांकि इस बार एक तिथि का क्षय होने के कारण नवरात्रि के व्रत 9 की बजाय 8 दिनों तक रखे जाएंगे।

चैत्र नवरात्रि और हिन्दू नववर्ष के आरंभ के समय मीन राशि में 6 ग्रहों का योग बन रहा है। सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, शनि और राहु सभी 6 ग्रह एक साथ मीन राशि में गोचर करेंगे। दैनिक योगों में ऐंद्र योग रात्रि 7:40 तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:14 के बाद से आरंभ होगा। यह योग दिन में 2:14 तक रहेगा। इन योगों में ही हिन्दू नववर्ष 2082 का आरंभ और नवरात्रि का कलश स्थापन होगा। इस कारण कलश स्थापन सूर्योदय से दिन में 2:14 बजे तक ही है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्रि का आरंभ होता है। घर-घर कलश स्थापन, चंडी पाठ व उपासक लोग व्रत और उपवास करते हैं। पूजा पंडालों में सप्तमी तिथि को मां दुर्गा की स्थापना की जाती है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का आरंभ होता है। प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना की जाती है और मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूपों की विधि-विधान से पूजा करने का विधान है। साल 2025 में नवरात्रि का कलश स्थापित करने के लिए समय 30 मार्च को सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।

30 मार्च रविवार को कलश स्थापना प्रात: काल से मध्याह्न 2.25 तक। अभिजीत मुहूर्त (मध्याह्न) 11 बजकर 24 मिनट बजे से 12 बजकर 36 मिनट तक। श्रद्धालुओं को शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापना करनी चाहिए। यह शुभ फलदायक होगा।

कौन सी तिथि का क्षय हो रहा है


पंचमी तिथि का क्षय होने से इस बार नवरात्रि 9 दिन की बजाय 8 दिन की होगी। इस नवरात्रि को चैत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह चैत्र माह में आती है। चैत्र नवरात्रि के अलावा इसे वासंतिक नवरात्रि भी कहते हैं। इस बार 31 मार्च को द्वितीया तिथि सुबह 9:12 मिनट तक रहेगी। इसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी जो 1 अप्रैल को सुबह लगभग 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। यानि तृतीया तिथि का क्षय होगा। इसलिए 31 मार्च को माता ब्रह्माचारिणी और चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी।

किस दिन होगी किस देवी की पूजा


प्रथम नवरात्र 30 मार्च रविवार : घट स्थापना व मां शैलपुत्री पूजा

द्वितिया नवरात्र 31 मार्च सोमवार: मां चंद्रघंटा की पूजा

तृतीय नवरात्र 1 अप्रैल मंगलवार: मां कुष्मांडा की पूजा

चतुर्थी व पंचमी नवरात्र 2 अप्रैल बुधवार: मां स्कंदमाता की पूजा

षष्ठी नवरात्र 3 अप्रैल गुरुवार: मां कात्यायनी की पूजा

सप्तमी नवरात्र 4 अप्रैल शुक्रवार: मां कालरात्रि की पूजा

अष्टमी नवरात्र 5 अप्रैल शनिवार: मां महागौरी की पूजा

नवमी नवरात्र 6 अप्रैल रविवार : मां सिद्धिदात्री की पूजा

चैत्र नवरात्रि का महत्व

चैत्र नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। यह पूजा शक्ति, साहस, और विजय की प्रतीक मानी जाती है। यह पर्व जीवन में किसी भी प्रकार के सकारात्मक परिवर्तन, उन्नति, और सफलता की प्राप्ति के लिए समर्पित है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करके भक्त अपने जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति करते हैं। नवरात्रि के समय को विशेष रूप से ध्यान, उपवास, और साधना के लिए आदर्श माना जाता है। भक्त इस समय उपवास रखते हैं, मंत्र जाप करते हैं, और देवी माँ से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा विधि का पालन करते हैं। यह समय आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और शरीर की ताकत को बढ़ाने के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है।

नोट: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य और सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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