अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ संभावित समझौते की दिशा में प्रगति होने के बाद अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोक दी है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यह निर्णय स्थायी नहीं है और तभी तक प्रभावी रहेगा, जब तक दोनों पक्ष शीघ्रता से अंतिम समझौते तक पहुंचने में सफल रहते हैं। ट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है।
समझौते की संभावना के बाद टली सैन्य कार्रवाईडोनाल्ड ट्रंप ने अपने सामाजिक माध्यम मंच पर जारी संदेश में कहा कि ईरान और पश्चिम एशिया के कुछ अन्य देशों की ओर से अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया गया था। उनके अनुसार, दोनों पक्षों के बीच संभावित समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है। इसी अनुरोध को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने सप्ताहांत में प्रस्तावित हमले को फिलहाल रद्द करने का फैसला लिया है।
ट्रंप ने कहा कि यदि यह समझौता शीघ्रता से अंतिम रूप नहीं लेता है तो अमेरिका अपने विकल्पों पर दोबारा विचार कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल क्षेत्रीय शांति ही नहीं, बल्कि ईरान को स्थिर और समृद्ध भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने का भी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का दावाट्रंप ने अपने संदेश में यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौते के प्रमुख बिंदुओं में होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल, पूर्ण और बिना किसी बाधा के खोलना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरे को समाप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। ऐसे में यदि यह मार्ग पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होता है तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
इजराइल के सहयोग का भी किया दावाडोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि इजराइल ने भी अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयासों में सहयोग देने पर सहमति जताई है। उनके अनुसार, यदि यह समझौता सफल होता है तो पिछले कई महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
हालांकि ट्रंप के इस दावे के बाद इजराइल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि ट्रंप के बयान पर इजराइली सरकार की औपचारिक स्थिति क्या है।
ईरान ने पहले ही दी थी कड़ी चेतावनीइस बीच ईरान ने अमेरिका को पहले ही आगाह किया था कि यदि उसके खिलाफ किसी प्रकार की नई सैन्य कार्रवाई की गई तो उसका कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्र के कई देशों के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत के दौरान अमेरिका की संभावित कार्रवाई को पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के आक्रमण का ईरान पूरी क्षमता के साथ जवाब देगा और इससे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।
कई देशों के साथ हुई कूटनीतिक बातचीतईरान के विदेश मंत्री
ने तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों से अलग-अलग
वार्ताएं कीं। इन चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, बढ़ते तनाव और संभावित
सैन्य टकराव के प्रभावों पर विस्तार से विचार किया गया। ईरान ने इन देशों
को अपनी स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि वह किसी भी बाहरी आक्रमण के खिलाफ
कठोर रुख अपनाएगा।
इन वार्ताओं का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के साथ
समन्वय बनाए रखना और संभावित संकट की स्थिति में साझा रणनीति पर विचार
करना भी माना जा रहा है।
क्षेत्र में तनाव अब भी बरकरारहालांकि
अमेरिका की ओर से फिलहाल सैन्य कार्रवाई टालने की घोषणा की गई है, लेकिन
पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच
विश्वास की कमी और लंबे समय से चले आ रहे विवादों को देखते हुए आने वाले
दिनों में कूटनीतिक वार्ताओं की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यदि
प्रस्तावित समझौता समय पर अंतिम रूप नहीं लेता है तो क्षेत्र में एक बार
फिर सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।