पश्चिमी विक्षोभ की फिर दस्तक, पहाड़ों पर बारिश-बर्फबारी के साथ दिल्ली-NCR समेत इन राज्यों में बदलेगा मौसम

देश के कई हिस्सों में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के बीच उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, इसके प्रभाव से 6 से 10 अक्टूबर के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम के बदलने का असर दिखाई दे सकता है। वहीं, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में भी कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है।

मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है। दिल्ली और उससे सटे एनसीआर के इलाकों में भी अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज बदलने के आसार हैं। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

एक साथ कई मौसमी सिस्टम सक्रिय


IMD के ताजा बुलेटिन के अनुसार, इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में कई मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं। मध्य और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक वेस्टलीज़ में एक नया पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ के रूप में दिखाई दे रहा है। इसकी धुरी मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर लगभग 64°E देशांतर और 32°N अक्षांश के उत्तर में स्थित है।

इसके अलावा निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर गांगेय पश्चिम बंगाल से मध्य महाराष्ट्र तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से पूर्वी बांग्लादेश तक भी एक अन्य ट्रफ सक्रिय है। उत्तर-मध्य बिहार से उत्तरी ओडिशा तक एक और ट्रफ रेखा बनी हुई है।

दक्षिण भारत में भी मौसमी गतिविधियां सक्रिय हैं। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और आसपास के क्षेत्रों पर निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ बर्फबारी


6 से 10 अक्टूबर के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी भी हो सकती है। IMD ने इन क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की संभावना भी जताई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में बदलाव का असर उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 6 से 11 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।
दिल्ली-NCR में 6 अक्टूबर से बदलेगा मौसम

दिल्ली में 5 अक्टूबर को मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है। इस दौरान अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। हालांकि, 6 अक्टूबर को राजधानी में मौसम में बदलाव की संभावना है। IMD ने हल्की बारिश या बूंदाबांदी के साथ आंधी और बिजली चमकने का अनुमान जताया है। इसके बाद बुधवार और गुरुवार को दिल्ली के आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं।

इस दौरान दिल्ली में अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। यानी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राजधानी में तापमान में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है।

दक्षिण भारत में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है, वहीं दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर तेज रहने का अनुमान है। 5 अक्टूबर को तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बहुत भारी बारिश हो सकती है। IMD ने यहां 12 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश की संभावना जताई है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराइकल और केरल में भी 5 और 6 अक्टूबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

पूर्वोत्तर और पूर्वी हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 5 अक्टूबर को भारी बारिश दर्ज की गई है और अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने का अनुमान है।

पिछले 24 घंटे में कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश?

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के सूंगाछी में 18 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। तमिलनाडु के अलकराई एस्टेट और कोथागिरी में 12-12 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा असम, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई।

मॉनसून की वापसी भी जारी

देश के कई हिस्सों में बारिश के बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी भी आगे बढ़ रही है। फिलहाल मॉनसून की वापसी की रेखा बिहार के सुपौल, झारखंड के रांची, छत्तीसगढ़ के रायपुर, ब्रह्मपुरी, परभणी, महाराष्ट्र के बारामती और हरनाई से होकर गुजर रही है। इस बीच उत्तर-पश्चिम भारत में नए पश्चिमी विक्षोभ और देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय अन्य मौसमी प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में बारिश और तापमान में बदलाव देखने को मिल सकता है।