प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर फैल रही अफवाहों पर ट्रस्ट की अपील, कहा- अधूरी जानकारी से छवि धूमिल न करें

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज का केलि कुंज आश्रम पिछले कुछ दिनों में सामने आई अलग-अलग घटनाओं के चलते चर्चा में है। 25 सितंबर 2026 को आश्रम से जुड़े साधक रसिक दुलारी शरण की खुदकुशी की घटना, अनुज चौधरी के लापता होने और नोएडा की एक युवती के गायब होने की खबरों के बाद सोशल मीडिया पर आश्रम और प्रेमानंद महाराज को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं। हालांकि, इन घटनाओं को सीधे केलि कुंज आश्रम या प्रेमानंद महाराज से जोड़ने के लिए फिलहाल कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है।

इन घटनाओं के बीच श्री राधा केलि कुंज ट्रस्ट प्रबंधन ने एक अपील जारी कर श्रद्धालुओं और आम लोगों से अधूरी जानकारी, अफवाहों और पूर्वानुमानों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने को कहा है। ट्रस्ट ने यह भी कहा है कि रसिक दुलारी शरण की मौत के मामले में पुलिस प्रशासन की जांच में आश्रम की ओर से पूरा सहयोग किया जा रहा है।

रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद जांच जारी

25 सितंबर को प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत की घटना सामने आई थी। इसके बाद मामले की पुलिस जांच शुरू हुई। आश्रम प्रबंधन ने इस घटना पर दुख जताते हुए मृतक साधक के परिवार के प्रति संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की है। ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि हाल की घटना से प्रेमानंद महाराज और आश्रम से जुड़े सभी लोग आहत हैं। साथ ही पुलिस प्रशासन के साथ जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। ट्रस्ट ने जांच पूरी होने तक लोगों से किसी भी अधूरी जानकारी या अपुष्ट बात को आधार बनाकर आश्रम और प्रेमानंद महाराज की छवि को नुकसान पहुंचाने से बचने की अपील की है।

अनुज चौधरी और नोएडा की युवती को लेकर क्या जानकारी है

अनुज चौधरी ने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी, लेकिन वह केलि कुंज आश्रम में नहीं रहता था। दीक्षा लेने के बाद वह पिछले करीब तीन महीने से बरसाना के लाड़ली दास आश्रम में रह रहा था। उसके लापता होने की खबर सामने आने के बाद इस मामले को भी प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जोड़कर देखा जाने लगा। वहीं, नोएडा की एक युवती के गायब होने को लेकर भी आश्रम का नाम चर्चा में आया। बताया गया कि वह 15 अगस्त को प्रेमानंद महाराज से मिलने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन उसके बाद से उसका पता नहीं चला। हालांकि, उसके केलि कुंज आश्रम में होने की पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह प्रेमानंद महाराज के आश्रम में पहुंची थी या नहीं। इन घटनाओं की पुष्टि के बिना सोशल मीडिया पर आश्रम को लेकर सवाल उठाए जाने के बीच ट्रस्ट ने लोगों से जांच पूरी होने तक अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।

आश्रम में दर्शन और दीक्षा को लेकर बदलाव

इन घटनाओं के बाद केलि कुंज आश्रम की व्यवस्था में कुछ बदलाव किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि आश्रम में दर्शन और दीक्षा पर रोक लगा दी गई है। टोकन के माध्यम से होने वाले दर्शन भी फिलहाल बंद बताए जा रहे हैं। इसके अलावा यमुना विहार कुंज बेलवान में दीक्षा प्राप्त भक्तों की एंट्री भी रोकने की जानकारी है। आश्रम में रहने वाले साधक-साधिकाओं के लिए पहले लागू ड्रेस कोड में भी बदलाव की बात सामने आई है। पहले साधक-साधिकाएं सफेद मार्किन के कपड़े और पीला अचला पहनते थे। अब वे सामान्य कपड़ों या कुर्ता-पायजामा में दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन सभी फैसलों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है।
प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने की प्रक्रिया क्या है

प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने की प्रक्रिया में सबसे पहले आश्रम जाकर महाराज से मिलने के लिए टोकन लेना होता है। टोकन में दिए गए समय के अनुसार साधक को मिलने का अवसर मिलता है। इस दौरान उससे दीक्षा लेने के कारण के बारे में जानकारी ली जाती है। दीक्षा के बाद गृहस्थ जीवन जीने वाले साधकों के नियम अलग होते हैं, जबकि वैराग्य का जीवन अपनाने की इच्छा रखने वालों के लिए अलग प्रक्रिया बताई गई है। पहली बार नाम दर्ज होने के बाद साधक का दीक्षा कार्ड बनाया जाता है। इसके बाद साधक को हर दो महीने में वृंदावन स्थित आश्रम आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और अपनी साधना की प्रगति के बारे में संतों को जानकारी देने की प्रक्रिया से गुजरना होता है। पूरी प्रक्रिया और साधक के आचरण के मूल्यांकन में एक से दो साल या उससे अधिक समय लग सकता है।

शादीशुदा और अविवाहित लोगों के लिए अलग नियम

दीक्षा से जुड़े नियमों में वैवाहिक स्थिति का भी ध्यान रखा जाता है। यदि कोई साधक शादीशुदा है और उसके जीवनसाथी की सहमति नहीं है, तो उसे दीक्षा नहीं दी जाती। वहीं, अविवाहित साधक के लिए माता-पिता की लिखित अनुमति या उनकी मौजूदगी जरूरी बताई गई है। लड़कियों को शादी से पहले सामान्य तौर पर दीक्षा नहीं दिए जाने की बात भी बताई गई है।

करीब 3000 वर्ग गज में फैला है केलि कुंज आश्रम

केलि कुंज आश्रम करीब 3000 वर्ग गज क्षेत्र में फैला हुआ बताया जाता है। आश्रम में लगभग 1000 से 1500 शिष्य रहते हैं। बताया गया है कि शुरुआत में आश्रम के पास जमीन का क्षेत्र कम था, लेकिन केलि कुंज का निर्माण शुरू होने के बाद अतिरिक्त जमीन खरीदी गई और उसे आश्रम परिसर में शामिल किया गया। मुख्य गेट से प्रवेश करने के बाद आश्रम के हॉल तक जाने का रास्ता एक छोटे गार्डन और कृत्रिम कुंड से होकर गुजरता है। इसी हॉल में प्रेमानंद महाराज रात में पैदल पहुंचने के बाद करीब एक घंटे तक कीर्तन करते हैं। कीर्तन हॉल में श्रीजी विराजमान हैं और उनका रोजाना श्रृंगार किया जाता है। आम श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था बैरिकेडिंग के पीछे रहती है, जबकि बैरिकेड के आगे प्रेमानंद महाराज, उनके शिष्य और संगीतकार बैठते हैं। श्रीजी के कीर्तन में शामिल होने के दौरान प्रेमानंद महाराज के बैठने के लिए भी एक निश्चित स्थान है। आश्रम परिसर में एक छोटा कमरा भी है, जहां प्रेमानंद महाराज एकांत में भक्तों के सवालों का जवाब देते हैं।

ट्रस्ट ने जांच पूरी होने तक अफवाहों से बचने को कहा


हाल की घटनाओं के बाद ट्रस्ट की अपील का मुख्य जोर इस बात पर है कि पुलिस जांच पूरी होने से पहले अधूरी जानकारी, अफवाह या पूर्वानुमान के आधार पर आश्रम और प्रेमानंद महाराज को लेकर कोई धारणा न बनाई जाए। ट्रस्ट ने पुलिस प्रशासन के साथ जांच में सहयोग करने की बात कही है और मृतक साधक के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।