पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बढ़त के बाद कोलकाता में राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें बीजेपी कार्यकर्ता जीत के जश्न में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते नजर आ रहे हैं। चुनावी रुझानों में बीजेपी की बढ़त के बाद कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है और इसी के चलते यह जश्न सड़कों तक पहुंच गया।
सीएम आवास के बाहर बीजेपी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शनवीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ बीजेपी समर्थक कोलकाता स्थित मुख्यमंत्री आवास के पास पहुंचकर नारेबाजी कर रहे हैं। इस दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगातार लगाए गए, जिससे वहां मौजूद माहौल काफी गरम हो गया।
स्थिति को देखते हुए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और भीड़ को शांत करने तथा वहां से हटने की अपील की। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी तरह की हिंसक झड़प की सूचना नहीं मिली, लेकिन इलाके में कुछ समय के लिए तनाव जरूर देखने को मिला।
‘जय श्री राम’ नारे को लेकर पहले भी रहा विवादपश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘जय श्री राम’ का नारा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। बीजेपी की रैलियों और कार्यक्रमों में यह नारा आमतौर पर सुनाई देता है, जबकि कई मौकों पर यह विवाद का कारण भी बन चुका है।
2021 के एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान जब कुछ लोगों ने ममता बनर्जी के सामने यह नारा लगाया था, तब वह नाराज हो गई थीं और उन्होंने मंच से अपना संबोधन देने से इनकार कर दिया था। उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे, जिससे यह घटना और ज्यादा चर्चा में आ गई थी।
2021 की घटना: भाषण से इनकार कर चुकी हैं ममताउस समय ममता बनर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम में गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने इसे राजनीतिक मंच में बदलने की आलोचना करते हुए कहा था कि आमंत्रित करने के बाद किसी का अपमान उचित नहीं है।
इसके विरोध स्वरूप उन्होंने भाषण देने से भी मना कर दिया था, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया था।
2019 में काफिले के दौरान भी हुआ था विरोधइससे पहले 2019 में भी ममता बनर्जी के साथ एक ऐसा ही वाकया हुआ था। पूर्वी मेदिनीपुर के चंद्रकना इलाके से गुजरते समय उनके काफिले के सामने कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए थे।
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने अपनी गाड़ी रोक दी थी और नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध दर्ज कराया था। तब भी यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था और राज्य की राजनीति में इसे लेकर तीखी बहस देखने को मिली थी।