नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी के कारण सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही की शुरुआत में छह पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उसके बाद सदस्यों से शांति बनाए रखने तथा सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की। हालांकि, लगातार जारी हंगामे के चलते उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि वे इन दोनों मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे।
कंगना रनौत ने विपक्ष के रवैये पर उठाए सवालसंसद के भीतर जारी गतिरोध के बीच भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने विपक्ष की रणनीति पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी गई सरकार पर इस प्रकार दबाव बनाना उचित नहीं है। कंगना ने कहा कि विपक्ष सरकार का आर्म ट्विस्ट नहीं कर सकता और यह तय नहीं कर सकता कि सरकार में कौन मंत्री रहेगा और किसे हटाया जाएगा। उनके अनुसार, मंत्रिमंडल से जुड़े निर्णय लेना पूरी तरह निर्वाचित सरकार का अधिकार है और विपक्ष इस पर दबाव की राजनीति नहीं कर सकता।
उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि विपक्ष को सरकार चलाने का इतना ही शौक है, तो उसे जनता के बीच जाकर चुनाव जीतना चाहिए और बहुमत हासिल कर सत्ता में आना चाहिए। केवल विरोध और हंगामे के जरिए सरकार को अपनी शर्तें मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर दी प्रतिक्रियाकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने कहा कि संसद का उद्देश्य देशहित के विषयों पर गंभीर चर्चा करना है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपने सभी सवाल और आरोप सदन के भीतर नियमों के तहत रखने चाहिए, ताकि सरकार उनका जवाब दे सके। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद बहस और संवाद का सबसे प्रभावी मंच है, जहां जनहित से जुड़े हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है।
कंगना ने कहा कि सरकार भी चाहती है कि मानसून सत्र सुचारू रूप से चले और विपक्ष अपनी बात पूरी मजबूती से सदन में रखे। लेकिन चर्चा छोड़कर लगातार हंगामा करना, नारेबाजी करना और कार्यवाही बाधित करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसके भी तय नियम और मर्यादाएं हैं।
पहले ही दिन गर्माया मानसून सत्रमानसून सत्र की शुरुआत से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक तनातनी देखने को मिली। कांग्रेस समेत विपक्षी दल नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और राम मंदिर चंदा मामले में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रही है।
सदन के भीतर लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही समय से पहले स्थगित करनी पड़ी, जबकि संसद परिसर के बाहर भी नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। पहले ही दिन जिस तरह का राजनीतिक टकराव देखने को मिला, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी इन मुद्दों को लेकर संसद में जोरदार बहस, विरोध और राजनीतिक संघर्ष जारी रहने की संभावना है।