तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान अब खुली जंग का रूप लेती दिखाई दे रही है। पार्टी के कुछ सांसदों की गतिविधियों और भाजपा नेताओं के साथ उनकी कथित नजदीकियों की खबरों के बाद संगठन के भीतर माहौल और गरमा गया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर कुछ बागी सांसदों की मौजूदगी की चर्चाओं के बीच TMC नेतृत्व ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर जमकर निशाना साधते हुए उन्हें सीधे तौर पर “गद्दार” करार दिया और कहा कि यदि वे वास्तव में पार्टी छोड़ना चाहते हैं तो पहले सांसद पद से इस्तीफा दें और फिर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जनता का सामना करें।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि उनका मोबाइल फोन मंगलवार सुबह से बंद है। उनके करीबी सहयोगियों के पास भी लोकसभा अध्यक्ष से संभावित मुलाकात या किसी औपचारिक कदम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इससे राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया है।
स्पीकर को अब तक नहीं मिला कोई पत्र: कल्याण बनर्जीकल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर हमला बोलते हुए कहा कि काकोली घोष दस्तीदार द्वारा लोकसभा स्पीकर को भेजे जाने की चर्चा वाला पत्र अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो पत्र सामने आया है और न ही स्पीकर कार्यालय ने इसकी पुष्टि की है। उनके अनुसार लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने भी स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह कुछ सांसद भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, उससे उनके राजनीतिक इरादे साफ हो गए हैं। कल्याण बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि अब उनके लिए ममता बनर्जी नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नेता बन चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ये सांसद दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचना चाहते हैं तो अंततः उन्हें भाजपा का दामन थामना ही पड़ेगा।
चुनाव में तारीफ, अब शिकायत क्यों?कल्याण बनर्जी ने कहा कि चुनाव के दौरान यही नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा करते थे और पार्टी की उपलब्धियों का बखान करते थे। लेकिन अब वही लोग यह कह रहे हैं कि वे तृणमूल कांग्रेस में रहकर विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में ऐसी कोई समस्या थी तो उसे पहले क्यों नहीं उठाया गया।
उन्होंने कहा कि अगर किसी को भाजपा में जाना है तो खुले तौर पर जाए, टिकट ले और चुनाव लड़कर जनता का समर्थन हासिल करे। उनके अनुसार पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक राह चुनना व्यक्तिगत फैसला हो सकता है, लेकिन जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात नहीं होना चाहिए। उन्होंने बागी नेताओं को “विश्वासघाती” बताते हुए कहा कि जनता सब कुछ देख रही है।
NDA पार्टी नहीं, गठबंधन है: कल्याण बनर्जीTMC सांसद ने आगे कहा कि जैसे ही बागी सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे, उनकी मंशा सबके सामने आ गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में चर्चित आरजी कर अस्पताल की घटना हुई थी, तब ये नेता कहां थे। उनके अनुसार उस समय पार्टी की ओर से आवाज उठाने वाले कुछ चुनिंदा लोग ही थे।
कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि यदि काकोली घोष दस्तीदार ने वास्तव में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, तो फिर वह पार्टी के भीतर किसी संसदीय जिम्मेदारी या पद की मांग कैसे कर सकती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि NDA कोई राजनीतिक दल नहीं बल्कि विभिन्न दलों का गठबंधन है। साथ ही उन्होंने कहा कि बागी गुट के पास अभी वह संख्या भी नहीं है, जो उन्हें दो-तिहाई समर्थन का दावा करने के लिए चाहिए।
“हमें हराया गया है, खत्म नहीं किया गया”अपने बयान में कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि हालिया चुनावी नतीजों को लेकर भ्रम नहीं पालना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को केवल वोटों के अंतर से पराजित किया गया है, लेकिन उसकी राजनीतिक ताकत खत्म नहीं हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भाजपा की स्थिति कमजोर होगी और तृणमूल कांग्रेस फिर मजबूती के साथ उभरेगी।
उन्होंने काकोली घोष और शर्मिला सरकार का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर पार्टी में उनके साथ ऐसा क्या हुआ, जिसकी वजह से वे इस तरह के कदम उठाने को मजबूर हुईं। उन्होंने यह भी कहा कि कई नेताओं को पार्टी नेतृत्व ने राजनीतिक अवसर दिए, चुनाव लड़वाए और पहचान दिलाई, लेकिन अब वही लोग संगठन के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
कीर्ति आजाद का भी तीखा हमलाTMC के वरिष्ठ सांसद कीर्ति आजाद ने भी बागी नेताओं को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा घटनाक्रम भाजपा की रणनीति का हिस्सा है और कुछ सांसद उसके प्रभाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने बार-बार अवसर दिए, वही आज संगठन के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं।
कीर्ति आजाद ने कहा कि काकोली घोष कई चुनाव हार चुकी थीं, लेकिन इसके बावजूद ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें सांसद बनने का अवसर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी से शिकायत थी तो उसे पहले संगठन के भीतर उठाया जाना चाहिए था। अब भाजपा नेताओं के घर जाकर बैठकों में शामिल होना और फिर पार्टी पर सवाल उठाना उचित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने बागी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में तृणमूल कांग्रेस से अलग रास्ता चुनना चाहते हैं तो उन्हें पूरी स्पष्टता के साथ ऐसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ चुके हैं या छोड़ना चाहते हैं, उन्हें भविष्य में तृणमूल कांग्रेस और उसके “मां, माटी, मानुष” के सिद्धांतों का नाम लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए। कीर्ति आजाद ने जोर देकर कहा कि यह पार्टी किसी को विरासत में नहीं मिली, बल्कि लंबे संघर्ष और जनआंदोलनों के जरिए खड़ी की गई है, इसलिए इसके साथ विश्वासघात करने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।