तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। पार्टी को एक सप्ताह के भीतर तीसरा बड़ा झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाते हुए अपने पद छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों ने टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। पहले से ही पार्टी के कई सांसद और विधायक नेतृत्व के खिलाफ खुलकर आवाज उठा चुके हैं। बताया जा रहा है कि लोकसभा में टीएमसी के 19 सांसदों ने अलग गुट के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग करते हुए स्पीकर को पत्र भी सौंपा है। वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा में 10 और लोकसभा में 28 सांसद हैं, लेकिन लगातार बढ़ती अंदरूनी खींचतान पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है।

बंगाल विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल और गहरा गया है। चुनाव के बाद कई विधायकों ने भी अलग राह पकड़ ली। जानकारी के अनुसार, विधानसभा में जीतकर पहुंचे 80 विधायकों में से 58 ने अलग गुट का समर्थन किया है और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता माना है। इस घटनाक्रम ने टीएमसी नेतृत्व की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

कौन हैं प्रकाश चिक बराइक?

प्रकाश चिक बराइक तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले से आने वाले बराइक को पार्टी का प्रमुख आदिवासी चेहरा माना जाता रहा है। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने चाय बागान कर्मचारी और श्रमिक नेता के रूप में लंबा समय बिताया था। जमीनी स्तर से राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले बराइक ने वर्षों तक संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पार्टी के अंदर उन्हें अभिषेक बनर्जी का करीबी नेता माना जाता रहा है। उनके राजनीतिक सफर को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने अगस्त 2023 में उन्हें पश्चिम बंगाल से निर्विरोध राज्यसभा भेजा था। इसके अलावा उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में अलीपुरद्वार सीट से भी चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई थी। शिक्षा की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2004 में सिलीगुड़ी स्थित सूर्यसेन कॉलेज से कॉमर्स विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी, जो उत्तरी बंगाल विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे ने बढ़ाई थी हलचल

प्रकाश चिक बराइक से पहले 8 जून 2026 को सुखेंदु शेखर राय ने भी राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। राय को ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ सहयोगियों में से एक माना जाता रहा है। उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना गया था क्योंकि वह लंबे समय तक टीएमसी की रणनीतिक और संसदीय राजनीति का अहम चेहरा रहे हैं।

इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के लिए टीएमसी सरकार के लंबे शासनकाल और संगठनात्मक कमजोरियों को जिम्मेदार ठहराया था। राय के बयानों ने पार्टी के भीतर चल रही असहमति को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया था।

अब प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के भीतर विभाजन की चर्चा तेज हो गई है। लगातार हो रहे इस्तीफों और बगावत के सुरों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के सामने केवल विपक्षी दलों की चुनौती नहीं, बल्कि संगठन के भीतर बढ़ती असहमति को संभालना भी एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में टीएमसी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।