पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। ममता बनर्जी की पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) इस समय गंभीर राजनीतिक दबाव में नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी को स्थानीय निकाय स्तर पर भी बड़ा झटका लगा है। खबर है कि TMC के 91 पार्षदों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस सामूहिक फैसले के बाद राज्य के कई नगर निगमों और नगर पालिकाओं में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और विपक्ष इसे TMC के कमजोर पड़ते संगठन का संकेत बता रहा है।
भाजपा की ओर से दावा किया जा रहा है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नगर निकायों में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज होने लगी है। इसी वजह से TMC के कई स्थानीय नेता और पार्षद असहज महसूस कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल महिला मोर्चा की सोशल मीडिया प्रभारी Lakshmi Singh ने आरोप लगाया कि लेखा परीक्षण और भ्रष्टाचार मामलों की जांच के डर से कई जनप्रतिनिधि अब पार्टी छोड़ने लगे हैं। उनके मुताबिक कई पार्षदों ने खुलकर कहा है कि वे अब TMC के साथ अपना राजनीतिक भविष्य नहीं देख रहे।
लक्ष्मी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC अंदरूनी संकट से जूझ रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की नई भाजपा सरकार द्वारा नगर निकायों के खातों की जांच शुरू किए जाने के बाद पार्टी के भीतर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई है। कई पार्षद और नगरपालिका अध्यक्ष अब दूसरे दलों से संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विभिन्न नगर निकायों में प्रशासनिक अव्यवस्था बढ़ती जा रही है और TMC का स्थानीय नेटवर्क तेजी से कमजोर पड़ रहा है।
सूत्रों की मानें तो नई सरकार के सत्ता में आने के बाद कई नगर निगमों और पालिकाओं में पुराने कामकाज की फाइलों की जांच शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपये के कथित घोटाले, अवैध टेंडर, फर्जी बिल और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही है। इन संभावित खुलासों को लेकर TMC के स्थानीय नेताओं में बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कई नेता जांच एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
91 पार्षदों के एक साथ इस्तीफा देने का असर अब प्रशासनिक ढांचे पर भी दिखाई देने लगा है। जिन नगर निकायों में TMC के पास स्पष्ट बहुमत था, वहां नेतृत्व संकट खड़ा हो गया है। कई जगहों पर अध्यक्ष और महत्वपूर्ण पद खाली होने की खबर है। नगर निकायों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण विकास योजनाओं पर असर पड़ा है। सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई काम धीमे पड़ गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम TMC के नगरपालिका स्तर पर कमजोर होते प्रभाव की शुरुआत हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने राज्य के अधिकतर नगर निकायों पर मजबूत पकड़ बनाई थी, लेकिन हालिया चुनावी नतीजों के बाद हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में पार्टी को स्थानीय स्तर पर और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दूसरी ओर भाजपा नेताओं का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में TMC के कई और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। भाजपा का आरोप है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान TMC ने भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति को बढ़ावा दिया, जिसका असर अब सामने आ रहा है। भाजपा नेताओं का दावा है कि कई ईमानदार पार्षद अब उनकी पार्टी के संपर्क में हैं और जल्द ही बंगाल की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि All India Trinamool Congress की तरफ से अब तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी के कुछ नेताओं ने जरूर भाजपा पर राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पार्षदों पर दबाव बनाकर इस्तीफे दिलवाए जा रहे हैं ताकि राज्य में अस्थिरता का माहौल तैयार किया जा सके और राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।