पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल का पहला महीना पूरा कर लिया है। इस एक महीने के दौरान राज्य में कई ऐसे फैसले और घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा पैदा की। सरकार ने शुरुआती दिनों में ही कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाए, जिनमें स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य बनाने का निर्णय, सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने पर रोक, सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 142 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का फैसला और राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए टाटा समूह की वापसी जैसे प्रयास शामिल रहे।
सरकार के इन फैसलों को समर्थक जहां प्रशासनिक दृढ़ता और नई दिशा के तौर पर देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इन पर लगातार सवाल उठा रहा है। इसके बावजूद पहले 30 दिनों में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है।
राजनीतिक माहौल में भी तेज हुई हलचलसरकार के एक महीने पूरे होने के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है और कई नेताओं के पार्टी में शामिल होने की खबरें सुर्खियों में हैं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस को लेकर भी लगातार राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि कई नेता भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि दिल्ली में टीएमसी के कुछ असंतुष्ट सांसदों की गतिविधियों ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय संक्रमण के दौर से गुजर रही है, जहां सत्ता परिवर्तन के बाद नए समीकरण लगातार बनते और बदलते दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने की विकास कार्यों की समीक्षासरकार के पहले महीने की उपलब्धियों और चुनौतियों का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को मेदिनीपुर में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में सांसद जून मालिया, विधायक सुइली साहा और सांसद दीपक अधिकारी ने भी भाग लिया।
बैठक के दौरान जिले की कानून-व्यवस्था, बाढ़ प्रबंधन, सड़क निर्माण परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट मांगी और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया।
जनप्रतिनिधियों ने रखीं स्थानीय समस्याएंबैठक में शामिल जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं और मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा। सांसद जून मालिया ने मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी और शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और जल निकासी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताई।
वहीं विधायक सुइली साहा ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने तथा 100 दिन के रोजगार कार्यक्रम में गति लाने की मांग रखी। दूसरी ओर सांसद दीपक अधिकारी ने युवाओं के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई।
विभागों को 15 दिन की समयसीमासमीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेदिनीपुर क्षेत्र राज्य की सांस्कृतिक विरासत और विकास दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बंगाल में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्रीगौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। राज्य के राजनीतिक इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण क्षण माना गया, क्योंकि पहली बार भाजपा का कोई नेता पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बना। उनका शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया था, जहां राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी।
मुख्यमंत्री बनने से पहले शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल विधानसभा में 2021 से 2026 तक नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके थे। विपक्ष के प्रमुख चेहरे से राज्य के मुख्यमंत्री बनने तक का उनका राजनीतिक सफर पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब सरकार के पहले 30 दिन पूरे होने के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में प्रशासनिक सुधार, विकास परियोजनाएं और राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।