दिल में राम, नयन में कृष्ण… काबा-मदीना गीत विवाद पर TMC सांसद सायोनी घोष को मिला सियासी जवाब, वीडियो वायरल

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर सांस्कृतिक और राजनीतिक बयानबाज़ी को लेकर गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सायोनी घोष एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। चुनावी माहौल के दौरान उनके द्वारा गाए गए “काबा-मदीना” गीत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां भाजपा खेमे की ओर से एक जवाबी गीत सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भाजपा समर्थक एक महिला कार्यकर्ता बांग्ला भाषा में गीत गाती नजर आती हैं, जिसके बोल को सायोनी घोष के पुराने गीत पर सीधा तंज माना जा रहा है।

इस वायरल वीडियो में गाए गए गीत का भावार्थ कुछ ऐसा बताया जा रहा है—“दिल में राम और नयन में कृष्ण…”। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर यह वीडियो लगातार शेयर किया जा रहा है और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। इस वीडियो को सबसे पहले बंगाल की सामाजिक कार्यकर्ता सुनंदा आचार्य ने साझा किया था, जो भाजपा समर्थक मानी जाती हैं और अक्सर टीएमसी पर तीखे राजनीतिक हमले करती रहती हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो किसी भाजपा रैली का है, जहां मंच पर पार्टी से जुड़े नेताओं के पोस्टर भी दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे “राजनीतिक जवाब” के रूप में देख रहे हैं।
गौरतलब है कि विधानसभा और चुनावी प्रचार के दौरान सायोनी घोष का “काबा-मदीना” वाला गीत पहले भी काफी विवादों में रहा था। उनके इस गीत के बोल—“दिल में काबा और आंखों में मदीना”—को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। उस समय विपक्ष की ओर से टीएमसी पर तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप भी लगाए गए थे और यह मामला लंबे समय तक चर्चा में बना रहा।

अब इस नए वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर सायोनी घोष को लेकर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स इसे “जैसे को तैसा” की प्रतिक्रिया बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पूरे मामले को राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है—कुछ लोग इस गीत को “जवाबी बयान” कहकर समर्थन दे रहे हैं, तो कुछ इसे अनावश्यक राजनीतिक विवाद बता रहे हैं। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के इस्तेमाल को और उजागर करता है।

इसी बीच बंगाल की राजनीति में दल-बदल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सौमित्र खान ने दावा किया है कि टीएमसी के कई सांसद पार्टी छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार लगभग 20 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और जैसे ही पार्टी नेतृत्व की अनुमति मिलेगी, वे पाला बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा होता है तो टीएमसी की राजनीतिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

हालांकि, इस दावे को टीएमसी की ओर से सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सौगत राय ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि भाजपा की ओर से फैलाया जा रहा यह दावा वास्तविकता से दूर है और ऐसी कोई स्थिति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी में किसी तरह की टूट या बड़े स्तर पर पाला बदलने की कोई संभावना नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के वीडियो और बयानों ने पश्चिम बंगाल की सियासत को एक बार फिर तीखे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर बयान अब सीधे राजनीतिक संदेश की तरह देखा जा रहा है।