पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई सरकार का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि उनके साथ पांच अन्य नेताओं ने मंत्री पद संभाला। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। लेकिन राजनीतिक हलचल के बीच एक भावुक पल तब देखने को मिला जब प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों से मुलाकात की।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद पीएम मोदी ने भाजपा कार्यकर्ता देबासिस मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री परिजनों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। भाजपा ने इस मुलाकात के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं के बलिदान को भुलाया नहीं जाएगा और उनके परिवारों के साथ पार्टी मजबूती से खड़ी रहेगी।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में इस अवसर पर एक विशेष स्मारक भी तैयार किया गया, जिसमें राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले करीब 300 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं। स्मारक पर सभी मृतकों के नाम और उनके क्षेत्रों का उल्लेख बांग्ला भाषा में किया गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह स्मारक उन लोगों की याद और सम्मान में बनाया गया है, जिन्होंने पार्टी के लिए संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवाई। पार्टी का यह भी दावा है कि आने वाले समय में हिंसा के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का प्रयास होगा।
हालांकि, चर्चा इस बात को लेकर भी हुई कि इस स्मारक में शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ का नाम शामिल नहीं है। भाजपा से जुड़े लोगों का कहना है कि चंद्रनाथ रथ भारतीय वायुसेना से जुड़े रहे थे और आधिकारिक रूप से भाजपा कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि वह शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक के रूप में कार्य कर रहे थे। इसी वजह से उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ग्रहण से पहले इस स्मारक पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और मृतकों के नामों के सामने पुष्प चढ़ाए। कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने कहा कि यह दिन उनके लिए खुशी और दुख दोनों का मिश्रण है। एक ओर पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने का उत्साह है, तो दूसरी ओर उन कार्यकर्ताओं की याद भी है जिन्होंने राजनीतिक संघर्ष में अपनी जान गंवाई।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मंच से ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए गए। कई वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय तक सनातन और भाजपा समर्थकों को दबाने की कोशिश की गई। मंच से यह भी कहा गया कि नई सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की नीति पर काम करेगी, लेकिन हिंसा और अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि पश्चिम बंगाल में हर चुनाव के बाद राजनीतिक हिंसा की घटनाएं देखने को मिलती रही हैं। भाजपा समर्थकों ने दावा किया कि इस बार भी चुनाव परिणाम आने के बाद हिंसा की कोशिशें हुईं और शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी की हत्या भी इसी साजिश का हिस्सा थी। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।