पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को हटाए जाने को लेकर उठा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने देर रात करीब 20 फीट ऊंची नेहरू की मूर्ति को दोबारा उसी स्थान पर स्थापित कर दिया। इससे पहले प्रतिमा हटाए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को 24 घंटे के भीतर इसे वापस लगाने का अल्टीमेटम दिया था।
प्रतिमा दोबारा लगाए जाने की कार्रवाई कथित तौर पर देर रात और गोपनीय तरीके से की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रशासन ने मीडिया की मौजूदगी और संभावित जनआक्रोश से बचने के लिए पूरे ऑपरेशन को शांतिपूर्वक अंजाम दिया।
1980 के दशक में स्थापित हुई थी प्रतिमाउपलब्ध जानकारी के अनुसार, नेहरू की यह विशाल प्रतिमा 1980 के दशक की शुरुआत में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की जमीन पर लगाई गई थी। यह प्रतिमा एक स्कूल परिसर के पास स्थित है, जिसकी जमीन फिलहाल एक मेडिटेशन सेंटर को लीज पर दी गई है।
प्रतिमा को हटाए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि क्रेन की मदद से मूर्ति को उसके स्थान से हटाकर पास के जंगल जैसे इलाके में लावारिस हालत में छोड़ दिया गया।
स्थानीय कार्यक्रम के लिए मूर्ति हटाने का आरोपकांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि एक स्थानीय कार्यक्रम के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से नेहरू की प्रतिमा को वहां से हटाया गया। स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे जानबूझकर की गई कार्रवाई बताते हुए प्रशासन से प्रतिमा को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक उसी स्थान पर स्थापित करने की मांग की।
मामले में कांग्रेस की ओर से 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया गया था। इसके बाद प्रतिमा को दोबारा स्थापित किए जाने की खबर सामने आई।
हालांकि, भाजपा के स्थानीय नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि प्रतिमा हटाने में भारतीय जनता पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। भाजपा नेताओं ने इसे स्थानीय गुटबाजी अथवा आंतरिक राजनीतिक विवाद से जुड़ा मामला होने की संभावना बताई।
दोबारा स्थापना के बाद कांग्रेस का प्रदर्शनदेर रात प्रतिमा को वापस स्थापित किए जाने के बाद मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। वहां कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को दूध से नहलाया और इसे प्रतीकात्मक ‘शुद्धिकरण’ के रूप में किया।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। प्रतिमा हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उसके दोबारा स्थापित किए जाने के बाद फिलहाल एक अलग चरण में पहुंच गया है। हालांकि, प्रतिमा हटाए जाने के कारणों को लेकर कांग्रेस और भाजपा की ओर से सामने आए दावों में अंतर बना हुआ है।