अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। इस पूरे प्रकरण को लेकर अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है और जांच पूरी होने के बाद सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं और यदि किसी ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अवश्य होगी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली या रसूखदार व्यक्ति क्यों न हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही है।
सबूत रखने वाले लोग आगे आएं: मुख्यमंत्रीराम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर चल रही चर्चाओं और आरोप-प्रत्यारोप के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से सहयोग की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस मामले से जुड़े कोई तथ्य, दस्तावेज या प्रमाण हैं तो वह बिना किसी डर या दबाव के उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, SIT हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है और जांच के निष्कर्ष आने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से बचें तथा केवल तथ्यों के आधार पर ही अपनी राय बनाएं।
अयोध्या को बदनाम करने वालों से सावधान रहने की सलाहमुख्यमंत्री ने अपने बयान में उन तत्वों पर भी निशाना साधा जिन्हें उन्होंने अयोध्या की छवि खराब करने की कोशिश करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग धार्मिक आस्था और संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल कर भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोगों के बहकावे में आने से बचना चाहिए।
उन्होंने रामभक्तों से सजग रहने का आह्वान करते हुए कहा कि अयोध्या की गरिमा और राम मंदिर से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करना आवश्यक है।
जांच में सामने आए नए सवालइधर SIT की जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बिंदु भी सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने मंदिर में अर्पित किए गए हीरे जड़ित हार और चरण पादुका से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए कई लोगों से पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इन वस्तुओं की वर्तमान स्थिति को लेकर अलग-अलग व्यक्तियों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं।
जांच अधिकारियों को पूछताछ के दौरान कई बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाए हैं, जिसके कारण मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है। इसी वजह से अब इन बहुमूल्य धार्मिक वस्तुओं के हस्तांतरण और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया को खंगाला जा रहा है।
हार और चरण पादुका को लेकर अलग-अलग दावेसूत्रों के मुताबिक जांच टीम ने मंदिर के एक पुजारी से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने बताया कि भगवान को अर्पित किए जाने के बाद हीरे जड़ित हार और चरण पादुका टिन्नू यादव को लौटा दिए गए थे। हालांकि इस बयान के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।
बताया जा रहा है कि टिन्नू यादव ने जांच अधिकारियों के सामने कहा कि उन्होंने संबंधित वस्तुएं आगे आभूषणों की देखरेख से जुड़े कृष्ण देव तिवारी उर्फ केडी तिवारी को सौंप दी थीं। वहीं दूसरी ओर केडी तिवारी ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें न तो उक्त हार मिला और न ही चरण पादुका उनके पास पहुंची।
कई बिंदुओं पर उलझी जांचकेडी तिवारी ने पूछताछ में यह भी कहा कि उन्हें किसी प्रकार की सोने की ईंट या संबंधित रसीद प्राप्त नहीं हुई थी। अलग-अलग व्यक्तियों के विरोधाभासी बयानों के कारण जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
फिलहाल SIT पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच अधिकारी दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों का मिलान कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि मंदिर में चढ़ाई गई बहुमूल्य वस्तुएं किसके पास गईं और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी।
इस बीच पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।