10 दिन में तीसरा आतंकी हमला: कुलगाम में नाम पूछकर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक बार फिर आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम दिया है। दक्षिण कश्मीर के कीलम क्षेत्र में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की पहचान पूछने के बाद उन पर गोलियां चला दीं। इस हमले में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आतंकियों की तलाश के लिए व्यापक घेराबंदी एवं तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

नाम पूछकर बनाया निशाना


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों मजदूर रोजी-रोटी कमाने के लिए छत्तीसगढ़ से जम्मू-कश्मीर आए थे और कुलगाम के कीलम क्षेत्र में कार्य कर रहे थे। शुक्रवार को आतंकियों ने उन्हें रोककर पहले उनकी पहचान और नाम पूछा। इसके बाद दोनों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। गोलीबारी की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। हालांकि एक मजदूर ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे की हालत गंभीर होने पर उसे उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए श्रीनगर भेजा गया, जहां शनिवार को उपचार के दौरान उसकी भी मृत्यु हो गई।

दस दिनों में तीसरा बड़ा आतंकी हमला


जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में आतंकवादी गतिविधियों में एक बार फिर बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कुलगाम की यह घटना पिछले दस दिनों के भीतर तीसरा बड़ा आतंकी हमला मानी जा रही है। इससे पहले अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जवान पर आतंकवादी ने बेहद करीब से गोली चलाकर उसकी हत्या कर दी थी। लगातार हो रहे हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है और आतंकियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

दो वर्षों बाद प्रवासी मजदूरों पर बड़ा हमला

कश्मीर में बाहरी राज्यों से आए मजदूरों पर इस प्रकार का हमला लगभग दो वर्षों बाद सामने आया है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में बिहार के बांका जिले के निवासी अशोक चौहान की शोपियां जिले में अज्ञात आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसके बाद लंबे समय तक प्रवासी मजदूरों पर इस तरह की बड़ी आतंकी वारदात सामने नहीं आई थी। ऐसे में कुलगाम की घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुरक्षा बलों ने शुरू किया व्यापक तलाशी अभियान


हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। जंगलों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि हमले में शामिल आतंकवादियों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियां स्थानीय स्तर पर भी सूचनाएं जुटा रही हैं और सभी संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

उपराज्यपाल ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश


जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायरतापूर्ण और अमानवीय बताया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक तथा वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से घटना की जानकारी ली और सुरक्षा बलों को आतंकियों के विरुद्ध अभियान और तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें उनके अपराध की कठोर सजा दिलाई जाएगी। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

महबूबा मुफ्ती ने भी जताया दुख

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से आए मजदूर अपने परिवारों का पालन-पोषण करने के लिए कश्मीर में मेहनत-मजदूरी करते हैं। ऐसे निर्दोष लोगों को हिंसा का निशाना बनाना बेहद क्रूर और अमानवीय कृत्य है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमला किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।


सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

लगातार हो रही आतंकी घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेष रूप से अमरनाथ यात्रा के दौरान और उसके बाद सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाए जाने के बावजूद आतंकियों द्वारा आम नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाया जाना गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुटी हैं और पूरे क्षेत्र में निगरानी तथा तलाशी अभियान लगातार जारी है।