लखनऊ हत्याकांड: डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता, कारोबार के सपने देख रहा था बेटा, हत्या की वजह जानकर रह जाएंगे दंग

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आए सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। नामी कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उनके इकलौते बेटे अक्षत सिंह ने कर दी। वारदात के बाद आरोपी बेटे ने बेहद चालाकी से पिता के लापता होने का नाटक रचा और खुद ही उनकी तलाश में जुटा दिखा। लेकिन जब सच्चाई परत-दर-परत सामने आई, तो हर कोई हैरान रह गया।

करियर को लेकर बढ़ता गया टकराव

जांच में खुलासा हुआ कि इस जघन्य अपराध की जड़ में पिता-पुत्र के बीच करियर को लेकर लंबे समय से चल रहा मतभेद था। मानवेंद्र सिंह अपने बेटे को डॉक्टर बनते देखना चाहते थे। उनका सपना था कि बेटा मेडिकल की पढ़ाई कर समाज में नाम कमाए। दूसरी ओर अक्षत का झुकाव पारिवारिक कारोबार की ओर था। वह पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहता था।

पढ़ाई को लेकर दबाव और अपेक्षाओं ने दोनों के रिश्ते में खटास भर दी थी। बताया गया कि अक्षत ने प्रतिष्ठित स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी की। उसने दो बार परीक्षा दी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद उसका रुझान धीरे-धीरे पढ़ाई से हटकर पारिवारिक व्यापार की तरफ बढ़ने लगा।

संपन्न परिवार, मगर अंदरूनी तनाव

मानवेंद्र सिंह शहर के जाने-माने व्यवसायी थे। उनके पास चार पैथोलॉजी लैब और तीन शराब की दुकानें थीं। आर्थिक रूप से परिवार काफी मजबूत था। पत्नी के निधन के बाद वह अपने बेटे अक्षत और बेटी कृति के साथ आशियाना इलाके में रहते थे।

हालांकि बाहर से सबकुछ सामान्य दिखता था, लेकिन घर के भीतर तनाव लगातार बढ़ रहा था। पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे, जबकि अक्षत कारोबार में हाथ बंटाने को उत्सुक था। यह मतभेद समय के साथ बहस और झगड़ों में बदलता गया।
चोरी की घटना के बाद बढ़ा शक

करीब चार महीने पहले घर से कीमती गहनों और नकदी की चोरी का मामला सामने आया था। जांच में संकेत मिले कि यह काम घर के अंदर से ही हुआ है। बाद में संदेह अक्षत पर गया। इस घटना के बाद मानवेंद्र अपने बेटे की गतिविधियों पर नजर रखने लगे थे। माना जा रहा है कि इसी के बाद रिश्तों में दरार और गहरी हो गई।

विवाद से हत्या तक

20 फरवरी को पिता-पुत्र के बीच एक बार फिर तीखी बहस हुई। आरोप है कि इसी दौरान गुस्से में अक्षत ने घर में मौजूद लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। गोली लगते ही मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। आवाज सुनकर बहन कृति कमरे की ओर दौड़ी, लेकिन सामने का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गई।

हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की साजिश रची। उसने शव को तीसरी मंजिल से नीचे घसीटा। फिर बाजार से आरी खरीदकर लाया और शव के हाथ-पैर काट दिए। शरीर के टुकड़ों को कार में रखकर पारा क्षेत्र के सदरौना इलाके में फेंक आया। धड़ को ठिकाने लगाने में असफल रहने पर उसने एक नीला ड्रम खरीदा और उसमें भरकर छिपा दिया।

गुमशुदगी की कहानी और खुलासा

हत्या के बाद अक्षत ने पड़ोसियों और रिश्तेदारों को बताया कि पिता दिल्ली गए हैं और उनका फोन बंद है। वह खुद भी खोजबीन का नाटक करता रहा। लेकिन जब पुलिस ने गहराई से पूछताछ की, तो उसके बयान बदलने लगे। संदेह गहराया और सख्ती से पूछताछ के दौरान उसने सच कबूल कर लिया।