लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान शुक्रवार (17 अप्रैल) को एक ऐसा पल आया, जब गंभीर बहस के बीच हंसी का माहौल बन गया। विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने अपने भाषण की शुरुआत में ही एक टिप्पणी कर दी, जिससे पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे और कुछ देर के लिए माहौल हल्का हो गया।
दरअसल, जैसे ही राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए, लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने उनके हाथ की ओर इशारा करते हुए पूछा कि क्या हुआ है। इस पर राहुल ने सहज अंदाज में कहा कि उन्हें चोट लगी है। इसके बाद उन्होंने बोलने का अवसर देने के लिए अध्यक्ष का धन्यवाद किया और महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखनी शुरू की।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि आज के समय में महिलाएं देश की “ड्राइविंग फोर्स” बन चुकी हैं और राष्ट्रीय जीवन के हर क्षेत्र में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि हम सभी ने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है—चाहे वह मां हों, बहन हों या अन्य किसी रूप में। इसी दौरान उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, “माता, बहन, पत्नी—हर रूप में महिलाओं ने हमें प्रभावित किया है, हालांकि प्रधानमंत्री और मेरी तो पत्नी ही नहीं हैं।” इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद सदस्य हंस पड़े और खुद राहुल गांधी भी मुस्कुराते नजर आए।
इसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही उन्हें पति के रूप में अनुभव नहीं है, लेकिन महिलाओं के अन्य रूपों से उन्होंने जीवन के कई अहम सबक सीखे हैं। उन्होंने अपनी बहन Priyanka Gandhi Vadra का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हाल ही में अपने भाषण में वह प्रभाव छोड़ा, जो वह खुद लंबे समय में नहीं कर पाए। राहुल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके संबोधन के दौरान Amit Shah के चेहरे पर भी मुस्कान देखने को मिली।
अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi को याद किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने उन्हें डर का सामना करना और सच के साथ खड़े रहना सिखाया। अपने बचपन की एक घटना साझा करते हुए उन्होंने डर और उससे उबरने की बात कही और इसी संदर्भ में सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार चुनौतियों का सामना करने से कतराती है और समस्याओं से बचने की कोशिश करती है।
महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी राय रखते हुए राहुल गांधी ने इसे लेकर गंभीर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि मौजूदा बिल का महिला सशक्तिकरण से सीधा संबंध नहीं है और 2023 में पारित कानून ही वास्तविक महिला आरक्षण विधेयक था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नए प्रस्ताव के जरिए देश के चुनावी ढांचे में बदलाव करने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दलित समुदायों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक SC, ST और OBC वर्गों के हितों के खिलाफ है और महिलाओं के नाम पर एक बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी की जा रही है। अंत में उन्होंने कहा कि विपक्ष एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध करेगा और इसे पारित नहीं होने देने के लिए पूरी ताकत लगाएगा।