उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर लव जिहाद, धर्मांतरण और लैंड जिहाद जैसे मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को लखनऊ में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव के समापन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग भारत के प्रति निष्ठा नहीं रखते और यहां की संस्कृति व परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकते, उनके लिए यह देश कोई धर्मशाला नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों में बसती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी पूरे देश को एक सूत्र में बांधने की क्षमता रखते हैं। कार्यक्रम में कथा वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया था।
समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने की अपीलयोगी आदित्यनाथ ने कहा कि समय-समय पर ऐसी शक्तियां सक्रिय होती रही हैं जो समाज को जाति, भाषा, क्षेत्र और अन्य आधारों पर विभाजित करने की कोशिश करती हैं। लेकिन संत परंपरा हमेशा समाज को जोड़ने और राष्ट्र को मजबूत बनाने का कार्य करती रही है।
उन्होंने कहा कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं होता, बल्कि उससे मिलने वाले संदेशों को जीवन में उतारना अधिक महत्वपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे कथा के मूल भाव को समझें और उसे अपने आचरण का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रभु की शरण में आने वाला व्यक्ति अनेक प्रकार की विपत्तियों से सुरक्षित रहता है और उसका जीवन सुख-समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है।
राम नाम में हर समस्या का समाधान निहित हैमुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि संत समाज ने इसे केवल एक धार्मिक अभियान नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्न के रूप में देखा था। उन्होंने कहा कि संतों ने कभी इसका श्रेय लेने की कोशिश नहीं की, बल्कि भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित किया।
योगी ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे आदर्श जीवन, मर्यादा और राष्ट्र एकता के प्रतीक हैं। उनके अनुसार राजनीति और पूर्वाग्रह से प्रभावित कुछ लोगों को छोड़ दिया जाए तो लगभग हर भारतीय के जीवन में श्रीराम के आदर्शों की छाप दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि राम का नाम उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक देश को जोड़ने वाली शक्ति है।
राम जन्मभूमि आंदोलन और रामभद्राचार्य की भूमिका का किया जिक्रमुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ा संघर्ष लगभग 491 वर्षों तक चला और अंततः वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही श्रीराम की जन्मभूमि है।
उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की सराहना करते हुए कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर वह आरामदायक जीवन चुन सकते थे, लेकिन इसके बावजूद वे राष्ट्रहित और समाज कल्याण की भावना के साथ देशभर में श्रीराम की कथा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
रामायण के प्रसंगों के जरिए दिया संदेशअपने संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने रामायण के कई प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस काल में भी समाज को अस्थिर करने वाली नकारात्मक शक्तियां मौजूद थीं। रावण और उसके सहयोगियों का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों तक फैला हुआ था और उनके कारण आम जनजीवन प्रभावित होता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दंडकारण्य क्षेत्र खर-दूषण के आतंक से त्रस्त था, जबकि ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे पात्रों ने अनेक क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने कहा कि जब भी नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं, वे समाज की व्यवस्था, शिक्षा और विकास को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती हैं। यही कारण है कि समाज को हमेशा सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता होती है।
उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने का उदाहरण हैं भगवान रामयोगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन राष्ट्रीय एकता का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने बताया कि माता सीता के अपहरण के बाद श्रीराम ने उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक व्यापक संपर्क स्थापित किया और विभिन्न समुदायों को साथ लेकर अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि नारी सम्मान और उसकी सुरक्षा के लिए श्रीराम का जीवन प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में लव जिहाद का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के प्रति अधिक सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रामायण के संदेश आज भी सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
लव जिहाद और लैंड जिहाद पर दोहराया सख्त रुखमुख्यमंत्री ने कहा कि केरल हाई कोर्ट ने वर्ष 2009 और 2011 में धार्मिक जनसांख्यिकी में बदलाव से जुड़े मामलों पर चिंता व्यक्त की थी, लेकिन उस समय इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में धर्मांतरण और लव जिहाद से जुड़े मामलों पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून लागू किया था, फिर भी समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।
योगी आदित्यनाथ ने लैंड जिहाद का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अवैध कब्जों और भूमि से जुड़े विवादों के खिलाफ समाज को सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि खाली जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा जमाने की प्रवृत्ति को रोकना आवश्यक है।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि वे भगवान राम और भगवान शिव जैसे आदर्शों को केवल पूजने तक सीमित न रखें, बल्कि उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में भी उतारें। उन्होंने कहा कि जिसने श्रीराम के आदर्शों को अपनाया, उसका जीवन सफल और कल्याणकारी बना, जबकि जो लोग इन मूल्यों से दूर हुए, वे समाज में सम्मानजनक स्थान नहीं बना सके।