जयपुर। राजधानी जयपुर के प्रतिष्ठित सवाई मान सिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष (एचओडी) और वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एन.एल. डिसानिया ने खातीपुरा स्थित अपने आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद राजस्थान के चिकित्सा जगत में गहरा शोक व्याप्त है। डॉ. डिसानिया को संस्थान के सबसे अनुभवी और सम्मानित शिक्षकों में गिना जाता था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात उनका परिवार एक पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने गया था, जबकि डॉ. डिसानिया घर पर अकेले मौजूद थे। बुधवार सुबह जब परिवार वापस लौटा तो उन्हें घर के एक कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया। परिजन उन्हें तत्काल खातीपुरा स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया।
तीन दशक तक दी सेवाएं, हाल ही में शामिल हुए थे नए लैब के उद्घाटन मेंडॉ. एन.एल. डिसानिया ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज में लगभग 30 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। फोरेंसिक मेडिसिन की शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा सराहा गया। चिकित्सा शिक्षा से जुड़े लोगों के बीच उनकी पहचान एक कुशल शिक्षक और अनुभवी विशेषज्ञ के रूप में थी। कुछ दिन पहले ही उन्होंने एसएमएस अस्पताल में स्थापित अत्याधुनिक फोरेंसिक प्रयोगशाला के उद्घाटन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था और सक्रिय रूप से विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे।
उनके आकस्मिक निधन की सूचना मिलते ही एसएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन में शोक का माहौल छा गया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी, अस्पताल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी, वरिष्ठ चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा दिवंगत प्रोफेसर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
पुलिस और एफएसएल टीम ने शुरू की जांचघटना की जानकारी मिलने के बाद खातीपुरा थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे घटनास्थल को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया, जिसने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसके अलावा पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मुर्दाघर के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।
झोटवाड़ा पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल पुलिस ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है या नहीं।
तनाव की चर्चाएं, लेकिन पुलिस ने नहीं की पुष्टिडॉ. डिसानिया के कुछ परिचितों और सूत्रों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले उनके परिवार के एक सदस्य के खिलाफ आर्थिक अनियमितता से जुड़ा एक मामला दर्ज हुआ था। बताया जा रहा है कि इस कानूनी प्रक्रिया और सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर वह पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थे। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन दावों और आत्महत्या के बीच किसी भी तरह के संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा।
परिवार की ओर से भी अभी तक इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में छोड़ी अमिट पहचानडॉ. एन.एल. डिसानिया ने अपने लंबे कार्यकाल के दौरान फोरेंसिक मेडिसिन के क्षेत्र में अनेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और शोध कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। चिकित्सा शिक्षा और फोरेंसिक विज्ञान में उनके अनुभव का लाभ हजारों विद्यार्थियों और चिकित्सकों को मिला। उनके निधन से न केवल एसएमएस मेडिकल कॉलेज, बल्कि पूरे राजस्थान के मेडिकल समुदाय ने एक अनुभवी शिक्षक, कुशल विशेषज्ञ और सम्मानित चिकित्सक को खो दिया है। उनके परिवार में पत्नी, मेडिकल की पढ़ाई कर रहा एक बेटा और दो बेटियां हैं।