संसद के मानसून सत्र का आठवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार को एक बार फिर बाधित रही और दोनों सदनों को फिलहाल दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। खास बात यह रही कि दोपहर 12 बजे सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने से जुड़े अहम संशोधन विधेयक पर चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते इस पर विचार-विमर्श शुरू नहीं हो सका। सोमवार को सभी दलों के बीच चर्चा कराने पर सहमति बनने के बावजूद संसद में गतिरोध खत्म नहीं हो पाया।
राज्यसभा में अमित शाह के बयान की मांग पर जोरदार हंगामाराज्यसभा में विपक्ष ने लगातार सातवें दिन भी अपना विरोध जारी रखा। विपक्षी सांसद छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े घटनाक्रम पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग पर अड़े रहे। जैसे ही सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन में आवश्यक विधायी दस्तावेज रखवाने के बाद शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कराई, विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। लगातार बढ़ते शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और उसे दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
लोकसभा में भी पांच मिनट में रोकनी पड़ी कार्यवाहीलोकसभा में भी लगभग यही स्थिति देखने को मिली। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करने लगे। देखते ही देखते हंगामा इतना बढ़ गया कि बैठक शुरू होने के करीब पांच मिनट बाद ही लोकसभा की कार्यवाही भी दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। लगातार जारी विरोध के कारण सदन में निर्धारित विधायी कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
आज होनी थी पेपर लीक कानून पर अहम चर्चासंसदीय सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर सोमवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा कराने को लेकर सहमति बनी थी। इस महत्वपूर्ण विधेयक पर विस्तृत बहस के लिए करीब छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच यह विधेयक लोकसभा में पेश किया था। हालांकि मंगलवार को सदन में लगातार जारी गतिरोध के कारण इस पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी।
संशोधन विधेयक में क्या हैं नए प्रावधान?प्रस्तावित विधेयक में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 को और अधिक सख्त बनाने का प्रावधान किया गया है। संशोधन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक कराने, परीक्षा में नकल कराने या अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
वहीं यदि पेपर लीक किसी संगठित गिरोह या संगठित अपराध के तहत किया जाता है, तो दोषियों के लिए कम से कम सात वर्ष के कारावास और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी विधेयक में शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इन सख्त प्रावधानों का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना और पेपर लीक माफिया पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
पहले सप्ताह से ही हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में अब तक विपक्ष के लगातार विरोध के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही है। पहले सप्ताह में भी कोई महत्वपूर्ण विधायी कामकाज नहीं हो पाया था। सोमवार को भी नीट पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में तीखा गतिरोध देखने को मिला। अब मंगलवार को भी वही स्थिति दोहराए जाने से सरकार के कई अहम विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया एक बार फिर प्रभावित होती नजर आ रही है।