नई दिल्ली। लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने एक मंत्री को हटाकर बड़े राजनीतिक नुकसान से खुद को बचाने की कोशिश की है।
एक मंत्री को हटाकर प्रधानमंत्री को बचाने की कोशिश हुईलोकसभा में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जब पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो सदन के बाहर एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इससे साफ लगता है कि सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहत की सांस ली होगी। उनके मुताबिक, सरकार ने एक मंत्री को हटाकर अपने ऊपर बढ़ते राजनीतिक दबाव को कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचाने का प्रयास किया गया हो।
शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं को लेकर सरकार पर उठाए सवालअखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद से शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लगातार कमजोर करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न व्यवस्थाओं को एक समान बनाने के नाम पर शिक्षा तंत्र में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे छात्रों में असंतोष बढ़ता गया।
उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद देशभर के छात्र एकजुट हुए और उन्हें अपने परिवारों का भी व्यापक समर्थन मिला। इसी कारण यह आंदोलन लगातार मजबूत होता गया और अंततः सरकार को इस मुद्दे पर कदम उठाने पड़े। उनके अनुसार, छात्रों की आवाज को अनदेखा करना सरकार के लिए संभव नहीं रह गया था।
उत्तर प्रदेश के पेपर लीक मामलों का किया जिक्रसपा प्रमुख ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान 20 से अधिक भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं होगा।
इसी दौरान उन्होंने धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले दान, चढ़ावे और निधियों में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं कर पा रही है, तो पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण का दावा भी सवालों के घेरे में रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पर दबाव केवल विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि उसके अपने सांसदों की बढ़ती चिंताओं के कारण भी बना।
किरेन रिजिजू ने किया पलटवारअखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह विचार करने की जरूरत है कि कौन-सी व्यवस्था बेहतर है—वह जिसमें सरकार छात्रों की आवाज सुनते हुए संसद में नया कानून लेकर आती है, या वह जिसमें विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पूरे देश में आपातकाल जैसी स्थिति लागू कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों की चिंताओं का समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुद्दा कानून नहीं, सरकार की नीयत का हैकेंद्रीय मंत्री के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने आपातकाल का दौर स्वयं नहीं देखा, लेकिन उसके बारे में पढ़ा और सुना है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जो घटनाएं हुईं, उनमें उन्हें उसी तरह की झलक दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। असली जरूरत सरकार की नीयत को साफ रखने की है। उनके अनुसार, यदि सरकार पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ परीक्षा प्रणाली को संचालित करेगी, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर स्वतः अंकुश लगाया जा सकेगा। अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि जैसे आपातकाल के बाद देश में राजनीतिक परिवर्तन आया था, वैसे ही आने वाले समय में भी बदलाव निश्चित रूप से देखने को मिलेगा।