राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कांग्रेस विधायकों के साथ गुरुवार को विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने शिक्षा विभाग की मीडिया कवरेज को लेकर सरकार के आदेश पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने आने से रोकी जा रही है। मार्च में कांग्रेस नेता सचिन पायलट भी शामिल हुए और उन्होंने भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
शिक्षा विभाग के कवरेज संबंधी आदेश का विरोधटीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई कई शिक्षा योजनाओं और व्यवस्थाओं को मौजूदा सरकार द्वारा कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं और कई स्कूलों की इमारतें खराब स्थिति में हैं।
जूली ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा के साथ-साथ जनता के बीच भी उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों की समस्याओं को सामने आने से रोकना चाहती है, जबकि कांग्रेस प्रदेश के अलग-अलग स्कूलों में जाकर उनकी स्थिति लोगों के सामने रखने की तैयारी कर रही है।
खाली पद और जर्जर स्कूलों का मुद्दा उठायाविरोध मार्च के दौरान टीकाराम जूली ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर हमला बोला। उनके अनुसार, राज्य में करीब सवा लाख पद अब भी खाली हैं और लगभग 9 लाख बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। उन्होंने 3,768 स्कूलों के जर्जर होने और करीब 85 हजार क्लासरूम के क्षतिग्रस्त होने का भी दावा किया।
जूली ने कहा कि कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और कुछ जगहों पर भवनों की स्थिति ऐसी है कि छात्रों के लिए वहां पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सरकार से शिक्षा क्षेत्र की इन समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की मांग की।
कांग्रेस की पुरानी योजनाओं का भी किया जिक्रटीकाराम जूली ने अपने बयान में कांग्रेस शासन के दौरान शुरू किए गए शिक्षा कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान और समग्र शिक्षा अभियान समेत शिक्षा क्षेत्र में किए गए पुराने कार्यों का जिक्र करते हुए मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने सीएसआर फंड के इस्तेमाल को लेकर भी आरोप लगाया और कहा कि इस राशि का उपयोग स्कूलों की स्थिति सुधारने में किया जाना चाहिए। जूली ने दावा किया कि यदि यह पैसा स्कूलों के लिए इस्तेमाल होता, तो शिक्षा संस्थानों की स्थिति में सुधार देखने को मिलता।
सचिन पायलट ने भी सरकार को घेराकांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्कूलों का बुनियादी ढांचा बेहतर करना और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पायलट ने मानसून के दौरान स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर छत गिरने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक, पत्रकारों को ऐसे स्कूलों में जाने से रोकने का फैसला समस्याओं को छिपाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी और विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब देना होगा। पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि जिन स्कूलों को पहले खोला गया था, उनमें से कुछ को बंद किया जा रहा है और कई जगह छात्र शिक्षकों की कमी तथा खराब सुविधाओं के कारण विरोध कर रहे हैं।
शिक्षा के मुद्दे पर आगे भी आंदोलन का संकेतटीकाराम जूली ने संकेत दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे को यहीं नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी राजस्थान के अलग-अलग स्कूलों का दौरा कर वहां की स्थिति को जनता के सामने रखेगी। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के बजाय जनता की वास्तविक समस्याओं के रूप में उठाया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं के इन आरोपों के बीच अब शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। विधानसभा में भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगे जाने की संभावना है।