दिल्ली दंगों पर BJP नेताओं को बड़ी राहत, कपिल मिश्रा-प्रवेश वर्मा समेत कई के खिलाफ हेट स्पीच की याचिकाएं खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में कई नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से बीजेपी नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा समेत कई नेताओं को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के समक्ष कुल 15 याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें अलग-अलग नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि CAA और NRC के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कुछ भाषणों का उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंध था। इन दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत होने का उल्लेख याचिकाओं में किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कथित हेट स्पीच को लेकर संबंधित नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी।

कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR की मांग

शेख मुज्तबा फारूक की ओर से दायर एक याचिका में बीजेपी नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिका में CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए उनके भाषणों को दंगों से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।

हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐसी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही इन नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग पर आगे बढ़ने का रास्ता भी बंद हो गया।

विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी हुई थी

इन मामलों में सिर्फ बीजेपी नेताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की मांग नहीं की गई थी। लॉयर्स वॉइस की ओर से दाखिल एक अन्य याचिका में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया और असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्ष के कई नेताओं के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की मांग की गई थी।

इसी याचिका में हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग किए जाने का उल्लेख किया गया था। कोर्ट ने इस तरह की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

जामिया में पुलिस कार्रवाई की SIT जांच की मांग भी खारिज

डिवीजन बेंच ने 2019 में CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस की कथित बर्बरता की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की मांग वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

याचिकाओं में उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और संबंधित याचिकाएं भी खारिज कर दीं।

दिल्ली दंगों में पुलिस की भूमिका की जांच की मांग

कुछ अन्य याचिकाओं में 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस की भूमिका की जांच SIT से कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की थी कि इस जांच की निगरानी कोर्ट की ओर से की जाए।

इस तरह की मांगों में दंगों से जुड़े घटनाक्रम और पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने पर जोर दिया गया था। कोर्ट ने इन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
NIA जांच और विदेशी फंडिंग के आरोप वाली याचिका भी खारिज

एक अन्य याचिका में एक्टिविस्ट अजय गौतम ने CAA विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA से कराने की मांग की थी। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन घटनाओं के पीछे एक ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’ थी।

याचिका में यह भी दावा किया गया था कि कुछ एक्टिविस्टों को ‘विदेशी फंडिंग’ मिली थी। इन आरोपों की जांच NIA से कराने की मांग की गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया।

इस तरह दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषणों पर नेताओं के खिलाफ FIR, 2019 के जामिया मामले में SIT जांच, दिल्ली पुलिस की भूमिका की जांच और प्रदर्शनों से जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र की NIA जांच जैसी विभिन्न मांगों वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।