लोकमंथन-2026 के आयोजन में पूर्ण सहयोग देगी राज्य सरकार : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान अपनी शक्ति, भक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि, वीर परंपरा, विचारशीलता और लोक जीवन की विविध परंपराओं के लिए पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि यहां की लोककला, संत परंपराएं और साहित्यिक धरोहर भारत की सांस्कृतिक बहुलता का जीवंत प्रमाण हैं। वर्ष 2016 में ‘उपनिवेशवाद से मुक्ति’ की अवधारणा के साथ शुरू हुए लोकमंथन के पांचवें संस्करण का राजस्थान में आयोजन होना राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘हम भारत के लोग’ की थीम के साथ यह आयोजन वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को और अधिक सशक्त करता है। मुख्यमंत्री बुधवार को जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित लोकमंथन-2026 के कर्टन रेजर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि लोकमंथन का मूल उद्देश्य ऐसे मंच का निर्माण करना है जहां राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से प्रेरित विचारक, कर्मशील समाजसेवी, लोक कलाकार, कारीगर, शिक्षाविद, नीति निर्माता और युवा एक साथ संवाद कर सकें। उन्होंने बताया कि इस बार यह आयोजन भारतीय सभ्यता के वैश्विक संवाद का माध्यम बन रहा है, जिसमें विश्वभर में फैले भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं। इससे राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती और प्रतिष्ठा मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने राजनीति को राष्ट्र निर्माण की दिशा दी


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ राजनीति को राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाया है। उनके सभी निर्णयों, योजनाओं और अभियानों का केंद्र भारत माता, देश की जनता और भविष्य का भारत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सांस्कृतिक आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा प्रदान की है। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के पीछे यही भावना है कि भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति, ज्ञान परंपरा और बौद्धिक क्षमता के बल पर विश्व नेतृत्व की भूमिका निभाए। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन महाकाल लोक और सोमनाथ मंदिर जैसे उदाहरणों को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया
राज्य सरकार देगी हरसंभव सहयोग

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लोकमंथन-2026 के सफल आयोजन के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन राजस्थान को राष्ट्रीय और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त पहचान दिलाएगा। साथ ही उन्होंने आह्वान किया कि इस आयोजन को भारत की सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक शक्ति और ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प का भव्य उत्सव बनाया जाए।

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत का सांस्कृतिक इतिहास विश्व का सबसे प्राचीन और समृद्ध इतिहास है तथा लोकमंथन उसी विरासत से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल अतीत को जानने का माध्यम नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी है। ‘हम भारत के लोग’ केवल एक विषय नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक चेतना का प्रतीक है।

प्रज्ञा प्रवाह समिति के संयोजक जे. नंद कुमार ने कहा कि लोकमंथन समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर प्राचीन भारतीय मूल्यों पर सार्थक संवाद का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति के कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देना है।

उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान देश का सबसे अधिक सांस्कृतिक विविधता वाला राज्य है। वर्ष 2016 में भोपाल में ‘उपनिवेशवाद से मुक्ति’ विषय के साथ लोकमंथन की शुरुआत हुई थी और अब ऐसे समृद्ध सांस्कृतिक राज्य की राजधानी जयपुर में इसका पांचवां संस्करण आयोजित होना इसे नए आयाम प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर लोकमंथन की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया तथा जे. नंद कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘फोक से परे लोक’ का विमोचन भी हुआ। साथ ही राजस्थान के लोक कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघ चालक डॉ. रमेश चन्द्र अग्रवाल, पद्मश्री अल्गोजा वादक तगाराम भील, ध्रुपद गायिका डॉ. मधु भट्ट तैलंग सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।