टिकट कटने का दर्द नहीं छिपा पाए बीजेपी नेता, कैमरे के सामने रोए, फिर बन गए बागी

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में टिकटों के बंटवारे के बाद बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही दलों के सामने अपने ही नेताओं की नाराजगी बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई नेता पार्टी से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर गए हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए भावुक हो गए और अब उसी पार्टी के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने लंबे समय तक काम करने का दावा किया है।

टिकट कटने के बाद नेताओं की नाराजगी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रही। कई दावेदारों ने बगावत का रास्ता अपनाते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। उनका आरोप है कि पार्टी ने उनकी मेहनत और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा को नजरअंदाज कर दूसरे उम्मीदवारों को टिकट दे दिया।

टिकट नहीं मिला तो कैमरे के सामने रो पड़े विश्वास सैनी


जयपुर के वार्ड नंबर 49 से जुड़ा मामला इस नाराजगी की तस्वीर को और ज्यादा भावुक बना देता है। बीजेपी किसान मोर्चा के पदाधिकारी विश्वास सैनी अपनी पत्नी के लिए महिला आरक्षित सीट पर पार्टी का टिकट चाहते थे। हालांकि पार्टी ने किसी अन्य उम्मीदवार को मैदान में उतार दिया। इसके बाद विश्वास सैनी ने पत्नी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ाने का फैसला किया।

एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान जब विश्वास सैनी ने अपनी नाराजगी बताई तो वह कैमरे के सामने ही रो पड़े। वह काफी देर तक अपने आंसुओं को रोक नहीं सके। उन्होंने दावा किया कि जिस बीजेपी को उन्होंने अपने परिवार से भी ज्यादा महत्व दिया, उसी पार्टी ने उनके साथ धोखा किया।

विश्वास सैनी के मुताबिक, उन्हें अंतिम समय तक चुनाव चिह्न मिलने का भरोसा दिलाया जाता रहा, लेकिन नामांकन की प्रक्रिया के दौरान टिकट किसी और को दे दिया गया। अब वह अपनी पत्नी के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर प्रचार कर रहे हैं और लोगों से उस पार्टी को हराने की अपील कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत करने का दावा किया।
अविनाश सैनी भी टिकट नहीं मिलने से नाराज

बीजेपी किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष अविनाश सैनी भी टिकट को लेकर पार्टी से नाराज बताए गए हैं। वह पार्षद का टिकट चाहते थे। उनका दावा है कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया और सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

अविनाश सैनी का आरोप है कि नामांकन की अंतिम समय सीमा से कुछ घंटे पहले तक उन्हें टिकट और पार्टी सिंबल मिलने का भरोसा दिया गया, लेकिन आखिरी समय में किसी दूसरे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी ने ऐसे लोगों को टिकट दिया, जो केवल बीजेपी के नाम से जुड़े रहे, जबकि उनके जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई। अविनाश सैनी के मुताबिक, वह अपने स्वाभिमान और आत्मसम्मान की वजह से बागी होकर चुनाव मैदान में उतरने को मजबूर हुए।

कांग्रेस में भी टिकट को लेकर नाराजगी

टिकट वितरण से पैदा हुई नाराजगी का असर सिर्फ बीजेपी में नहीं दिख रहा है। कांग्रेस के नेता वजीर हुसैन ने भी पार्टी से नाराजगी जताई है। उनका दावा है कि उन्होंने करीब 40 साल तक कांग्रेस के लिए काम किया है।

वजीर हुसैन के मुताबिक, वह अपने वार्ड में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और स्थानीय लोगों के काम कराने में भी भूमिका निभाते रहे हैं। उनका दावा है कि इलाके के लोग उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में देखना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह किसी दूसरे उम्मीदवार को टिकट दे दिया।

उन्होंने पार्टी के फैसले को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे बाहरी या ‘पैराशूट’ प्रत्याशी को मौका देने के तौर पर बताया है।

दोनों दलों के सामने बागियों को संभालने की चुनौती

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों को अपने असंतुष्ट नेताओं का सामना करना पड़ रहा है। कई नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का रास्ता चुना है।

इन बागियों के आरोपों में टिकट वितरण में अनदेखी, आखिरी समय तक भरोसा देने के बाद उम्मीदवार बदलने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व नहीं देने जैसी बातें सामने आई हैं। अब दोनों प्रमुख दलों के सामने अपने नाराज नेताओं को मनाने और चुनावी नुकसान को सीमित करने की चुनौती है। हालांकि, बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी से स्थानीय स्तर पर मुकाबला कितना प्रभावित होगा, यह चुनावी नतीजों के बाद ही साफ होगा।