महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर तीखी टिप्पणी की है। संसद के मानसून सत्र के दौरान गृह मंत्री के सदन में मौजूद न रहने को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। संजय राउत ने कहा कि अमित शाह देशभर में अलग-अलग कार्यक्रमों में तो दिखाई देते हैं, संसद परिसर में भी नजर आते हैं, लेकिन जब लोकसभा और राज्यसभा में जवाब देने की बारी आती है तो वह सदन में उपस्थित नहीं होते। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार उनकी मौजूदगी का इंतजार कर रहा है, इसलिए अब उनकी गुमशुदगी के पोस्टर तक तैयार किए गए हैं।
राउत ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो गृह मंत्री के लापता होने की शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी। उनका कहना था कि अमित शाह को संसद में आकर विपक्ष के सवालों का सामना करना चाहिए। उन्होंने पूछा कि आखिर उन्हें किस बात का डर है? राउत ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से सरकार ने एजेंसियों के जरिए विपक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की है, फिर भी यदि गृह मंत्री सदन में आने से बच रहे हैं तो यह कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जब ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग, आईटी सेल और साइबर एजेंसियां उनके अधीन काम कर रही हैं, तब भी उनका सदन से दूरी बनाना समझ से परे है।
'गृह मंत्री को संसद में आकर जवाब देना ही होगा'संसद के मौजूदा सत्र में छात्र आंदोलन, राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले और विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इन अहम विषयों पर गृह मंत्री सदन में उपस्थित होकर जवाब नहीं दे रहे हैं।
इसी मुद्दे पर संजय राउत ने कहा, एक समय यही लोग इंदिरा गांधी को 'गूंगी गुड़िया' कहकर निशाना बनाते थे, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि देश के गृह मंत्री खुद सदन में आकर अपनी बात नहीं रख रहे। जो नेता हमेशा बड़े-बड़े बयान देते हैं, वे अब अचानक चुप क्यों हैं? पूरा विपक्ष एकजुट है और रहेगा। देश के गृह मंत्री को लोकतंत्र के इस सर्वोच्च मंच पर आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और सवालों का जवाब देना पड़ेगा।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर भी दी सफाईअयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर उठे विवाद पर भी संजय राउत ने अपनी पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कभी भी संत समाज पर कोई आरोप नहीं लगाया। उनका कहना था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
राउत ने कहा, हमने कभी नहीं कहा कि इस कथित घोटाले में संत शामिल हैं। हमारा आरोप केवल भाजपा के कुछ नेताओं पर है। भाजपा नेताओं को हमने कभी साधु-संत नहीं कहा और न ही उनकी तुलना संतों से की जा सकती है। संतों का जीवन तप, त्याग और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा होता है। क्या चंपत राय संत हैं? क्या अनिल मिश्रा संत हैं? क्या गोपाल राव संत हैं? नहीं, ये सभी भाजपा से जुड़े लोग हैं। हमने संत समाज का कभी अपमान नहीं किया और आगे भी ऐसा नहीं करेंगे।