बढ़ती बॉन्ड यील्ड पर उदय कोटक की गंभीर चेतावनी, सरकारी कर्ज बढ़ा तो महंगाई और ब्याज दरों का बढ़ेगा दबाव

नई दिल्ली। दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने दुनिया भर में बढ़ रही सरकारी बॉन्ड यील्ड को लेकर निवेशकों को सतर्क किया है। उन्होंने कहा है कि सरकारों पर बढ़ता कर्ज और लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा आने वाले समय में केंद्रीय बैंकों के सामने अपनी बैलेंसशीट बढ़ाने यानी अधिक पैसा जारी करने की स्थिति पैदा कर सकता है। उनके मुताबिक, ऐसा होने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और छोटी अवधि में ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

उदय कोटक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में उल्लेखनीय तेजी देखी जा रही है। जापान की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 3 प्रतिशत के स्तर को पार कर चुकी है, जिसे 1996 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। दूसरी ओर, अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 4.8 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है।

बढ़ते कर्ज पर उदय कोटक की चेतावनी


उदय कोटक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने विचार साझा करते हुए सरकारी कर्ज और बढ़ते राजकोषीय घाटे को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि यदि सरकारों का कर्ज और घाटा लगातार बढ़ता रहा तो केंद्रीय बैंकों के पास अपनी बैलेंसशीट का आकार बढ़ाने, यानी अधिक पैसा जारी करने के अलावा सीमित विकल्प रह सकते हैं।

कोटक के अनुसार, ऐसी स्थिति में महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा होगा। इसके साथ ही छोटी अवधि में ब्याज दरें भी ऊपर जा सकती हैं। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे ब्याज दरों में संभावित उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर तैयार रहें।

अपने पोस्ट में कोटक ने जापान और अमेरिका की बॉन्ड यील्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान की 10 साल की यील्ड 3 प्रतिशत और अमेरिका की 4.8 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। उन्होंने बढ़ते सरकारी कर्ज और घाटे को केंद्रीय बैंकों की बैलेंसशीट बढ़ाने की संभावित जरूरत से जोड़ते हुए महंगाई और अल्पावधि में ऊंची ब्याज दरों की आशंका जताई।
जापान की बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी क्यों अहम

जापान के सरकारी बॉन्ड बाजार में हुई तेज हलचल का असर केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जापान लंबे समय से वैश्विक स्तर पर बचत के एक बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है। वहां लंबे समय तक कम ब्याज दरों के कारण जापानी निवेशकों ने विदेशों में बॉन्ड और अन्य परिसंपत्तियों में बड़ी मात्रा में निवेश किया है।

अब जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड लगातार बढ़ने से निवेशकों के व्यवहार में बदलाव की संभावना बन सकती है। यदि घरेलू जापानी एसेट्स से मिलने वाला रिटर्न विदेशों में निवेश की तुलना में अधिक आकर्षक होने लगता है, तो जापानी निवेशक विदेशी बॉन्ड की अतिरिक्त खरीदारी कम कर सकते हैं।

ऐसा होने पर वैश्विक बॉन्ड बाजारों में यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ सकता है। इस वजह से जापानी बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलाव को वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दो साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़ी जापानी यील्ड

संदर्भ के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान जापान की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड तीन गुना से अधिक बढ़ चुकी है। इस तेजी के पीछे बढ़ती महंगाई, देश की राजकोषीय स्थिति को लेकर चिंता और बैंक ऑफ जापान की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार तेज किए जाने की उम्मीद जैसे कारकों का उल्लेख किया गया है।

बॉन्ड यील्ड में यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकारों के बढ़ते कर्ज और राजकोषीय घाटे को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है। उदय कोटक की चेतावनी इसी व्यापक स्थिति की ओर इशारा करती है, जिसमें बढ़ती बॉन्ड यील्ड, महंगाई और ब्याज दरों के बीच संबंध निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

उनके संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि निवेशकों को आने वाले समय में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।